प्रदेश में लगेगा दूसरा कार्बन फ्लक्स टॉवर प्रदेश में जल्द ही दूसरा कार्बन फ्लक्स टॉवर लगाया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय सुदूर संवेदन संस्थान (इसरो) हैदराबाद द्वारा मप्र के तीन जिले मंडला, डिंडौरी और शहडोल में सव्रे शुरू कर दिया गया है। सव्रे पूरा होने के बाद इनमें एक जिले को टॉवर के लिए चयनित कर लिया जाएगा। इसके लगने के बाद प्रदेश में कार्बन फ्लक्स के टॉवरों की संख्या दो हो जाएगी। गौरतलब है कि प्रदेश के वनमंत्री ने हाल में ही 31 जनवरी को लगा पहला टॉवर प्रदेश में पहला कार्बन फ्लक्स टॉवर बैतूल जिले के तावडी वन क्षेत्र में राष्ट्रीय कार्बन परियोजना के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सहयोग से 31 जनवरी 2012 को लगाया गया था। यह देश का चौथा कार्बन अनुमापन केंद्र है। विश्व में इस तरह के 550 और भारत में 15 अनुमापन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। क्या होगा लाभ : अनुमापन केंद्रों द्वारा एकत्रित किए गए आंकडों को अंतर्राष्ट्रीयस्तर पर भेजे जाएंगे। जो पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में मददगार सिद्ध होंगे। वहीं इस टॉवर से न के...
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घडियालों के पैसे पर डाल्फिन का संरक्षण प्रदेश में लगातार खत्म होती जा रही दुलर्भ प्रजाति की डाल्फिन पर ह र्षित चौरसिया की एक रिपोर् ट चंबल नदी में पाई जाने वाली दुलर्भ प्रजा ति की डाल्फिन (फ्रेश वॉटर रिवर डाल्फिन, सूस व वैज्ञानिक नाम प्लेटिनिक्टा) की संख्या साल दर साल घटती जा रही है। 5 अक्टूबर 2009 में राष्ट्रीय जल जीव घोषित दुलर्भ डाल्फिन के संरक्षण के लिए केंद्र द्वारा अलग से कोई राशि नहीं दी जा रही है। सूत्रों की मानें तो वन विभाग घडियालों के लिए आने वाली राशि में से ही डाल्फिन का संरक्षण किया जा रहा है। प्रदेश में एक मात्र अभयारण्य चंबल के पास से गुजरने वाली नदी में पाई जाने वाली डाल्फिन को प्रदेश में पहली बार सन 1984 में देखा गया था। इसके 12 साल बाद 1996 में आईसीयूसीएम की रेड डाटा बुक में वन्यजीवों की दुर्लभ प्रजातियों में संभावित स्थिति संकट ग्रस्त स्थिति में डाल्फिन को शामिल किया गया, जिसके बाद इसके संरक्षण के प्रयास शुरू किए गए। जानकारी मुताबिक 7 जुलाई 1997 में डब्ल्यडब्ल्यडब्ल्यू एफ ने दिल्ली में एक बैठक में 9 लोगों...
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पन्ना बफर जोन घोषित panna national park jungle safari जबलपुर। लंबी कवायदों के बाद आखिर पन्ना टाइगर रिजर्व को बफर जोन घोषित कर दिया गया। पन्ना के बफर जोन बन जाने के बाद अब प्रदेश में 6 टाइगर रिजर्व के साथ अब 6 बफर जोन भी हो गए है। बफर जोन का जितना फायदा ग्रामीणों को मिलेगा उतना ही लाभ इस क्षेत्र में विचरण करने वाले वन्यजीवों को। सूत्रों की मानें तो पन्ना को बफर जोन घोषित किए जाने के नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है, लेकिन यह नोटिफिकेशन अभी पन्ना नेशनल पार्क के अधिकारियों के पास तक नहीं पहुंचा है। गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पन्ना में बफर जोन गठित करने के लिए प्रदेश सरकार को सात दिन का समय दिया था। याचिकाकर्ता द्वारा 24 जुलाई को दिए गए निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार को पन्ना नेशनल पार्क में बफर जोन गठित करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया था। इसके अनुसार प्रदेश सरकार के पास बफर जोन के गठन के लिए 13 अगस्त तक का समय है। लगाया था अर्थदंड कोर्ट ने पिछली सुनवाई में बफर जोन गठित न करने के कारण मध्यप्रदेश सरकार पर दस हजार रूपए का अर्थदंड भी लगाया था। स...
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संजय टाइगर रिजर्व गूंजी दहाड़ आखिर मिल ही गया बाघों का कुनबा जबलपुर। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में एक के बाद एक तीन बाघों के मरने की खबर के बाद अब वन्यप्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर है। प्रदेश के संजय टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा होने की पुष्टि प्रदेश टुडे ने अपने 12 मई के अंक में (स्कैट रिपोर्ट के आधार) पर की थी। बाघों के पूरे परिवार के पार्क परिक्षेत्र में होने की पुष्टि वन विभाग द्वारा भी गई जाने के बाद पार्क प्रबंधन के अधिकारी काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। पार्क के अधिकारियों के मुताबिक पार्क परिक्षेत्र में 5 बाघों के होने की जानकारी दी गई है। विभाग ने इनके फुटमार्क के आधार पर पुष्टि की है। फुटमार्क के आधार पर इनकी लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा है। इनकी सुरक्षा को लेकर 24 घंटे गश्ती व गुप्त रूप मॉनीटरिंग की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है। एक नर, दो मादा, दो शावक अधिकारिक जानकारी के अनुसार पार्क परिक्षेत्र में 5 बाघों में एक नर, दो मादा, दो शावकों के विचरण कर रहे है। शावकों की उम्र करीब डेढ वर्ष बताई जा रही है। साथ गश्ती दल को बाघों द्वारा शिकार किए जानव...
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कर्नाटक के हाथियों का पहला पड़ाव बांधवगढ़ हर्षित चौरसिया, भोपाल प्रदेश में कर्नाटक से लाए जाने वाले हाथियों को लेकर वन विभाग इन दिनों जोर-शोर से पूरी तैयारियों में लगा हुआ है। हाथियों को कर्नाटक से जाए जाने को लेकर टेंडर निकाले जा चुके हैं। विभाग अनुमति मिलते ही ट्रांसपोर्टर व विभाग के अधिकारी कर्नाटक रवाना हो जाएंगे। कर्नाटक से आ रहे हाथियों का पहला पड़ाव बांधवगढ़ नेशनल पार्क होगा। यही से इन अतिथि हाथियों को अन्य नेशनल पार्क में भेजने की योजना बनाई जाएगी। हालांकि अभी योजना पर विचार चल रहा है कि आने वाले हाथियों को बिना किसी परेशानी के नेशनल पार्कों में पहुंचा दिया जाए। ये हाथी करीब 7 बड़े ट्रालों में आएंगे। एक ट्राले में दो हाथियों को रखने की व्यवस्था है। इनके साथ इनका खाना व देखरेख के लिए स्टाफ भी साथ-साथ चलेगा। जानकारी के मुताबिक कर्नाटक के सिमोधा, नगरहोल व बांदीपुर नेशनल पार्क से वन विभाग पहले चरण में 11 हाथी लाएगा। दूसरे चरण में 14 हाथी लाए जाएंगे। हाथियों को कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा नेशनल पार्क में रखा जाएगा। जहां ये हाथी बारिश के दौरान गश्त...
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बांधवगढ़: बाघ ने बाघ को मार के खाया, खुद भी मरा बांधवगढ़ में देर रात एक बाघ की मौत हो गई। पार्क का यह नर बाघ इतना खूंखार था कि इसने क्षेत्र में विचरण करने वाले एक अन्य बाघ को लड़ाई के दौरान मार दिया और आधा खा गया था। इस संघर्ष में बाघ बुरी तरह से घायल हो गय था। गश्त के दौरान यह घायल बाघ कुसरवाहा क्षेत्र के नाले के समीप मिला, जिसके बाद से बाघ का उपचार किया जा रहा था। लेकिन लगातार बिगड़ती हालत के बाद देर रात बाघ ने दम तोड़ दिया। पहुंची डॉक्टरों की टीम: बाघ की मौत का मामला संदिग्ध बताया जाने को लेकर आज सुबह वन्यप्राणी विशेषज्ञ डॉ. एबी श्रीवास्तव, कान्हा पार्क के डॉ. अग्रवाल, डॉ काजल जाधव पहुंच गए है। दो लोगों पर किया था हमला सूत्रों की मानें तो इस नर बाघ ने करीब 10 दिनों में दो लोगों पर हमला किया था। इस दौरान बाघ घायल अवस्था में था।
संजय टाइगर रिजर्व में गूंजी दहाड़
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हर्षित चौरसिया, भोपाल बाघ विहीन होने का दंश झेल रहे सीधी क्षेत्र के संजय टाइगर रिजर्व में अब बाघ की दहाड़ सुनाई देना शुरू हो गई है। पार्क के एक हिस्से पर बाघ ने अपना डेरा जमा लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बाघ का पूरा परिवार वहां जुट जाएगा। इस बात का खुलासा हाल ही में हैदराबाद से आई हेल्थ स्कैट रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पार्क से जो सैंपल लिए गए थे, उसमें से एक सैंपल की रिपोर्ट में बाघ होने की पुष्टि हो गई है। इससे उत्साहित पार्क प्रबंधन ने और भी सैंपल भेजे हैं। पार्क के डिप्टी डायरेक्टर विकास वर्मा ने बताया कि पार्क से और भी सैंपल भेजे गए हैं। हमें उम्मीद है कि उनकी रिपोर्ट भी पॉजीटिव मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि दूसरे सैंपलों में अन्य बाघ-बाघिन का होना पाया जाता है तो फिर इनका कुनबा बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। क्षेत्र में विचरण कर रहे बाघ पर पार्क प्रबंधन द्वारा मॉनिटरिंग की जा रही है। दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) भी पार्क की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है। संजय टाइगर रिजर्व पहु...
कुछ ऐसे होते है चीतल
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Spotted Deer ( चीतल ) ( Axis axis ) को Spotted Deer क्यों कहा जाता यह तो इसे देखने के बाद हर कोई समझ सकता है. जैसा की इसके नाम से स्पष्ट है की इसके शरीर पर स्पोट्स यानि धब्बे होते हैं. चीतल हिरनों मैं सबसे सुन्दर हिरन प्रजाति है. कॉर्बेट मैं चीतल सर्वाधिक संख्या मैं पाए जाते हैं तथा बाघों एवं तेंदुए का ये मुख्य आहार हैं. चीतल एक सामाजिक प्रजाति का जीव है तथा ये ८-१० से लेकर सैकड़ों तक के झुंडों मैं पाए जा सकते हैं. नर चीतल की ऊंचाई लगभग ३ फिट तक होती है तथा इनका वजन लगभग ७५-८० किलोग्राम तक होता है. चीतल की औसत आयु १०-१२ वर्ष होती है. मादा हिरन आकर मैं नर से थोड़ी छोटी होती है. नर के antlers की लम्बाई २ से २.५ फीट तक होती है व साल मैं एक बार ये नर अपने antlers को गिरा देते हैं. नर इन antlers को समागम कल मैं अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए करते हैं. समागम काल मैं नर काफी आक्रामक हो जाते हैं व अपने हरम के लिए काफी चोकन्ने रहते हैं. ये मादा को आकर्षित करने के लिए एक विशेष प्रकार की आवाज जिसे की rutting call...
तीन रूप में दर्शन देती हैं माता हरसिद्धि
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सागर। जिले में रहली तहसील में रानगिर हरसिद्धि माता का पवित्र स्थान है। रानगिर के पुजारी अनिल शास्त्री ने बताया कि रानगिर का 1100 वर्ष पुराना मंदिर है। यह मंदिर पहले रानगिर में नहीं था नदी के उस पार देवी जी रहती थी। प्रतिदिन माता कन्याओं के साथ खेलने के लिए आया करती थी। एक दिन गांव के लोगों ने छिपकर देखा कि यह किसकी लड़की है सुबह खेलने आती है एवं सायंकाल को एक चांदी का सिक्का देकर कन्याओं को बूढ़ी रानगिर को चली जाती हैं। उसी दिन हरसिद्धि माता ने सपना दिया कि मैं हरसिद्धि माता हूं बूढ़ी रानगिर में रहती हूं। यदि बूढ़ी रानगिर से रानगिर में ले जाया जाए तो रानगिर हमारा नया स्थान होगा। बूढ़ी रानगिर पुराना स्थान होगा। गांव के लोग एक समूह बनाकर बूढ़ी रानगिर में गए एक बड़े भारी बेल वृक्ष के नीचे हरसिद्धि की प्रतिमा मिली लोगों ने बेल की सिंहासन पर बैठाकर रानगिर लाए गाजे-बाजे के साथ और जहां रानगिर में देवी जी का मंदिर बना वहां पर उतारा लिया। सायंकाल का समय हो गया था। दूसरे दिन लोगों ने उठाने का प्रयास किया कि आगे की ओर ले जाया जाए देवी जी की मूर्ति वहां से फिर कहीं नहीं उठी न ही हिला सके। ऐसा माना जाता ह...
बायसन ने जन्मा बच्चा
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हर्षित चौरसिया, भोपाल। हाल ही में कान्हा से बांधवगढ़ शिफ्ट किए गए 31 बायसनों में से एक बायसन ने बच्चे को जन्म दिया है। पार्क के डिप्टी डायरेक्टर मृदुल पाठक ने बताया कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। कान्हा से लाए 31 बायसनों को दूसरे बाड़े में शिफ्ट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बायसन स्वस्थ है। इन पर पार्क प्रबंधन द्वारा कड़ी नजर रखी जा रही है। बायसन के बच्चे को मिलाकर बांधवगढ़ में अब इनकी संख्या 32 हो गई है। गौरतलब है कि विगत दिनों बायसनों को तीन चरणों में शिफ्ट किया गया था। प्रदेश में यह दूसरी बड़ी सफल शिफ्टिंग है, जिसे दक्षिण अफ्रीका से आई एक टीम व पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पार्क के ही कर्मचारियों ने अंजाम दिया।
भारी पड़ी शिफ्टिंग
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भोपाल। प्रदेश में दुर्लभ वन्यजीवों का कुनबा बढ़ाने को लेकर की जाने वाली पहली शिफ्टिंग ही वन विभाग को भारी पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में की गई प्रदेश की सबसे बड़ी कृष्ण मृगों की शिफ्टिंग सफल तो हो गई, लेकिन विभाग को जिस बात का डर था वही हुआ। शिफ्टिंग के 10 बाद से कृष्ण मृगों की मौत होने शुरू हो गई लगातार हो रही मौतों का आंकडा अब तक 16 पहुंच गया है। कृष्ण मृगों की खबर लगते ही विभाग में हड़कंप मच गया और विभाग के आलाअधिकारी अब मौत का कारण जानने की उधेडबुन में लग गए। पार्क में हुई कृष्ण मृगों की मौत के संबंध में जब पार्क के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि संभवत: ये मौत कैप्चर मायोपैथी से हुई है और ये एक सामान्य बात है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो पाने से कोई रोकथाम नहीं की जा सकती है। शेष कृष्ण मृग के व्यवहार पर नजर रखी जा रही है। अभी इन्हें स्वंतत्र क्षेत्र में विचरण के लिए नहीं छोड़ा गया है। हाल ही हुई कृष्ण मृगों की मौत के मामले के बाद विभाग प्रदेश में दिसंबर-जनवरी में होने वाली बारहसिंगा की शिफ्ंिटग को लेकर गहन चिंतन में लग गया है। जानकारी म...
अब घडियालों पर रिसर्च
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हर्षित चौरसिया, भोपाल। दिसंबर-2007 -08 में किसी अज्ञात बीमारी के कारण एक के बाद एक सैकड़ों की संख्या में अज्ञात बीमारी के चलते हुई घडियालों की मौत के बाद चिंतित वन्यप्राणी फांरेसिक स्वास्थ्य केंद्र जबलपुर इन दिनों घडियालों के स्वास्थ्य को लेकर कई पहलुओं पर रिसर्च चल रही है। रिसर्च कर रहे वन्यप्राणी फांरेसिक स्वास्थ्य केंद्र के निदेशक डॉ एबी श्रीवास्तव ने बताया कि घडियालों के ब्लड, नार्मल डाटा बेस, बीमारियां तथा अकारण घडियालों के बच्चों की मौत पर रिसर्च की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक घडियालों के ब्लड की नार्मल वेल्यू के बारे कोई जानकारी नहीं है इस रिसर्च में इनकी ब्लड की नार्मल वेल्यू पता की जा रही है साथ ही घडियालों का पूरा डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इस रिसर्च को पूरे होने में एक वर्ष और लगेगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च से प्राप्त परिणामों के आधार पर आने वाले समय में घडियालों तथा इनके बच्चों को बचाया जा सकता है। जल्द ही छोड़गें घडियालों के बच्चों को घडियाल पुर्नवास केंद्र में जून 2011 में चंबल नदी से लाए गए घडियालों के 500 अंडों में से करीब 423 बच्चे निकले। ये बच...
चीतों को शिफ्ट करने खर्च होंगे 82 करोड़
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इम्पोर्ट लायसेंस में अटके चीते भोपाल। पालनपुर कूनों में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाने में अभी और समय लग सकता है। हालांकि चीतों को लाने के लिए वन विभाग प्रपोजल बनाकर केंद्र को भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक चीतों को लाने के लिए इम्पोर्ट लायसेंस मिलना बाकी है। लायसेंस के लिए कागजी कार्रवाई तो शुरू कर दी गई है, लेकिन इसे मिलने में काफी वक्त लग सकता है। दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीतों को शिफ्ट किया जाना है जिनमें से 13 के लिए अनुमति मिल चुकी है शेष के लिए अनुमति मिलना बाकी है। चीतों को शिफ्टिंग पर करीब 82 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस राशि का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक चीतों को जहां शिफ्ट किया जाना है उस क्षेत्र में फैसिंग को रिपेयरिंग का काम किया जा रहा है। बॉक्स हाल ही सिवनी के राजस्व क्षेत्र से कान्हा शिफ्ट हुए 50 काले हिरण में से 18 की मौत हो जाने के बाद केंद्र ने बारहसिंगा की शिफ्टिंग को रोक दिया है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र से रिपोर्ट आने के बाद ही बारहसिंगों को शिफ्ट किया जाएगा। वर्जन विभाग ने प्रपोजल बनाकर भेज दिया है स्वी...