अब घडियालों पर रिसर्च

  हर्षित चौरसिया, भोपाल। दिसंबर-2007 -08 में किसी अज्ञात बीमारी के कारण एक के बाद एक सैकड़ों की संख्या में अज्ञात बीमारी के चलते हुई घडियालों की मौत के बाद चिंतित वन्यप्राणी फांरेसिक स्वास्थ्य केंद्र जबलपुर इन दिनों घडियालों के स्वास्थ्य को लेकर कई पहलुओं पर रिसर्च चल रही है। रिसर्च कर रहे वन्यप्राणी फांरेसिक स्वास्थ्य केंद्र के निदेशक डॉ एबी श्रीवास्तव ने बताया कि घडियालों के ब्लड, नार्मल डाटा बेस, बीमारियां तथा अकारण घडियालों के बच्चों की मौत पर रिसर्च की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक घडियालों के ब्लड की नार्मल वेल्यू के बारे कोई जानकारी नहीं है इस रिसर्च में इनकी ब्लड की नार्मल वेल्यू पता की जा रही है साथ ही घडियालों का पूरा डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इस रिसर्च को पूरे होने में एक वर्ष और लगेगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च से प्राप्त परिणामों के आधार पर आने वाले समय में घडियालों तथा इनके बच्चों को बचाया जा सकता है।
जल्द ही छोड़गें घडियालों के बच्चों को
घडियाल पुर्नवास केंद्र में जून 2011 में चंबल नदी से लाए गए  घडियालों के 500 अंडों में से करीब 423 बच्चे निकले। ये बच्चे अभी पूरी तरह स्वस्थ है। सूत्रों के मुताबिक इन्हें जल्द ही नदी में छोड़ दिया जाएगा।
अज्ञात बीमारी और भूख से हुई थी घडियालों की मौत : चंबल में हैरतअंगेज तरीके से हुई घडियालों की मौतों में जहां वैज्ञानिकों के एक समुदाय ने इसे लीवर क्लोसिस बीमारी को एक वजह माना तो वहीं दूसरी ओर अन्य वैज्ञानिकों के समूह ने चंबल के पानी में प्रदूषण की वजह से घडियालों की मौत को कारण माना। मौत की वजह साफ न होने से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने करोड़ों रुपए खर्च कर घडियालों की गतिविधियों को जानने के लिए उनके शरीर में ट्रांसमीटर प्रत्यारोपित किए, लेकिन मौत की वजह नहीं पता चल सकी।
फैक्ट फाइल
चंबल नदी में घड़ियालों की स्थिति
 कुल घडियाल928
385 एडल्ट
146 सबएडल्ट
170 छोटे
125 एक वर्ष
102 बच्चे
घडियाल पुर्नवास केंद्र
725 बच्चे

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