भारी पड़ी शिफ्टिंग

भोपाल। प्रदेश में दुर्लभ वन्यजीवों का कुनबा बढ़ाने को लेकर की जाने वाली पहली शिफ्टिंग ही वन विभाग को भारी पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में की गई प्रदेश की सबसे बड़ी कृष्ण मृगों की शिफ्टिंग सफल तो हो गई, लेकिन विभाग को जिस बात का डर था वही हुआ। शिफ्टिंग के 10 बाद से कृष्ण मृगों की मौत होने शुरू हो गई लगातार हो रही मौतों का आंकडा अब तक 16 पहुंच गया है। कृष्ण मृगों की खबर लगते ही विभाग में हड़कंप मच गया और विभाग के आलाअधिकारी अब मौत का कारण जानने की उधेडबुन में लग गए। पार्क में हुई कृष्ण मृगों की मौत के संबंध में जब पार्क के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि संभवत: ये मौत कैप्चर मायोपैथी से हुई है और ये एक सामान्य बात है।  विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो पाने से कोई रोकथाम नहीं की जा सकती है। शेष कृष्ण मृग के व्यवहार पर नजर रखी जा रही है। अभी इन्हें स्वंतत्र क्षेत्र में विचरण के लिए नहीं छोड़ा गया है।
हाल ही हुई कृष्ण मृगों की मौत के मामले के बाद विभाग प्रदेश में दिसंबर-जनवरी में होने वाली बारहसिंगा की शिफ्ंिटग को लेकर गहन चिंतन में लग गया है। जानकारी मुताबिक  दुर्लभ बारहसिंगा की प्रजाति कान्हा में ही है और इनकी तादाद भी कम है। यदि शिफ्टिंग के बाद  कृष्ण मृगों की तरह ही परिणाम आए तो इसकी  प्रजाति के लिए बड़ा खतरा होगा। हालांकि  फूंक-फूंक कर कदम रख रहे विभाग ने इस शिफ्टिंग अंजाम देने के लिए साउथ अफ्रीका से एक्सपर्ट को बुलाया है।
क्या कहते है विशेषज्ञ :  कान्हा में हुई कृष्ण मृगों की मौत के बारे में वन्यप्राणी विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी मौत केप्चर मायोपैथी से हुई है।
क्या है केप्चर मायोपैथी : जब भी किसी वन्यजीव को एक स्थान से दूसरे स्थान शिफ्ट करने के दौरान मांसपेशियां डेमेज हो जाती हैं जो इनकी मौत का कारण बनती है।
क्यों किया गया शिफ्ट : जानकारी मुताबिक कान्हा में 1990 के दशक के बाद से अज्ञात कारणों के चलते काले हिरण विलुप्त हो गए थे, जिसके बाद इनकी पुर्नस्थापना के लिए प्रयास किए जा रहे थे। दूसरा कारण प्रदेश में इनकी अच्छी तादाद होने तथा इनके द्वारा बड़ी मात्रा में फसलों को नुकसान कम करने के उद्देश्य से इन्हें शिफ्ट किया गया था।
आंध्रा से आए थे शिफ्टिंग एक्सपर्ट : कान्हा में कृष्ण मृगों को शिफ्ट करने के लिए विभाग ने आंध्र प्रदेश से एक 14 सदस्यीय एक्सपर्ट टीम को बुलाया था। इसके पीछे दो कारण बताए जा रहे है पहला कारण आंध्रा में टीम द्वारा करीब तीन हजार कृष्ण मृगों को सफल रूप से शिफ्ट किया गया था। दूसरा इस तरह का कोई भी शिफ्टिंग एक्सपर्ट प्रदेश में नहीं है जो कि कृष्ण मृगों को शिफ्ट कर सके। वहीं शिफ्टिंग इस दौरान टीम के द्वारा वन अधिकारियों और कर्मचारियों को शिफ्टिंग के गुर सिखाने जैसे कारण बताए गए।
जबलपुर लैब भेजे सैंपल : जानकारी मुताबिक कृष्ण मृगों की जांच के लिए सैंपल को जबलपुर लैब जांच के लिए भेज दिया गया है।
वहीं इस संबंध में पीसीसीएफ डॉ. एचएस पावला का कहना है कि कान्हा में जिन कृष्ण मृगों की मौत हुई है उनमें ज्यादातर कम उम्र हैं।   मौत के कारणों की जांच की जा रही है जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो सकेगा।

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