बिगडे हुए हालातों को काबू करने के लिए लगाई जाने वाली धारा 144 के बारे में आमतौर पर सभी परिचित है। लेकिन क्या आपने कभी बाघों की सुरक्षा के लिए इस धारा को लगाया जाना सुना है। जी हां कुछ यह धारा इन दिनों उमरिया जिले के अंर्तगत आने वाले ग्राम धामाखोर से निकलने वाली सडक पर जिले के कलेक्टर ने लगा दी है।
प्रदेश में यह पहली बार है जब एक मादा बाघ और उसके 4 शावकों की सुरक्षा के मद्देनजर रखते हुए लिया गया यह निर्णय पूरे प्रदेश में चर्चा में है। हालांकि सडक के किनारे अपने 15 दिन के 4 शावकों को लेकर बैठी हुई मादा बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अपनी मॉनीटरिंग में है, तो जिला कलेक्टर अभिषेक सिंह बाघ और उसके शावकों की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर दिखाई दे रहे है। फिलहाल पार्क की बाघिन टी-43 के 4 शावक पूरी तरह से स्वस्थ बताए जा रहे है।
क्या है आदेश
कलेक्टर ने उक्त क्षेत्र से गुजर रही सडक में शाम को 6 बजे से सुबह 6 बजे तक भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई है। इसके साथ ही दो पहिया वाहन जो कि सुबह 6 बजे के बाद निकलेंगे वे एक काफिले के रूप में वन विभाग की अनुमति से प्रवेश करेंगे। वहीं जो वाहन प्रवेश कर रहे है उन पर गति की सीमा भी तय कर दी गई है।
5 किमी का एरिया सील
बाघिन की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने 5 किमी तक के एरिया को सील कर दिया है। बाघिन से दूरी बनाकर रखते हुए अलग-अलग करीब आधा दर्जन टीमों को निगरानी के लिए लगाया है। इनमें वन विभाग के करीब 50 से अधिक कर्मचारी, अधिकारी शामिल है।
4 हाथी लगे गश्ती में
पार्क के अधिकारियों ने बताया कि शावकों के साथ बैठी बाघिन के खूखांरता को देखते हुए 4 हाथी दो-दो की शिफ्ट में लगाए गए है। इसके साथ वेटरनरी चिकित्सक भी यहां पर मौजूद है, जो कि इनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
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