संजय टाइगर रिजर्व में गूंजी दहाड़

  हर्षित चौरसिया, भोपाल
बाघ विहीन होने का दंश झेल रहे सीधी क्षेत्र के संजय टाइगर रिजर्व में अब बाघ की दहाड़ सुनाई देना शुरू हो गई है। पार्क के एक हिस्से पर बाघ ने अपना डेरा जमा लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बाघ का पूरा परिवार वहां जुट जाएगा। इस बात का खुलासा हाल ही में हैदराबाद से आई हेल्थ स्कैट रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पार्क से जो सैंपल लिए गए थे, उसमें से एक सैंपल की रिपोर्ट में बाघ होने की पुष्टि हो गई है। इससे उत्साहित पार्क प्रबंधन ने और भी सैंपल भेजे हैं। पार्क के डिप्टी डायरेक्टर विकास वर्मा ने बताया कि पार्क से और भी सैंपल भेजे गए हैं। हमें उम्मीद है कि उनकी रिपोर्ट भी पॉजीटिव मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि दूसरे सैंपलों में अन्य बाघ-बाघिन का होना पाया जाता है तो फिर इनका कुनबा बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। क्षेत्र में विचरण कर रहे बाघ पर पार्क प्रबंधन द्वारा मॉनिटरिंग की जा रही है। दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) भी पार्क की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

  संजय टाइगर रिजर्व पहुंचे एक्सपर्ट, दी ट्रेनिंग

संजय टाइगर रिजर्व में हैदराबाद से आई स्कैट रिपोर्ट में बाघ के होने की पुष्टि के बाद उत्साहित पार्क के अधिकारियों ने पार्क परिक्षेत्र में स्कैट के जरिए बाघों के बारे में महत्तवपूर्ण जानकारी जुटाए जाने को लेकर हैदराबाद से एक्सपर्ट को बुलवाया था। 16 मई को आए एक्सपर्टस ने करीब चार दिन तक पार्क के कर्मचारियों को स्केट इकठ्ठे करने की ट्रेनिंग दी। इस दौरान कर्मचारियों को कई महत्तवपूर्ण जानकार दी गई। गौरतलब है कि  पार्क परिक्षेत्र से दो सेंपल जांच के लिए 17 फरवरी को हैदराबाद भेजे थे, जिसकी रिपोर्ट में पूर्ण व्यस्क नर बाघ का होना पाया गया। बताया जाता है कि इसके पूर्व भी 26 दिसंबर 2011 को एक स्केट सेंपल देहरादून भेजा गया था।
क्या-क्या पता चलता है स्कैट रिपोर्ट में : जानकारों की मानें तो स्कैट रिपोर्ट से वन्यजीव का नर है मादा। उसकी उम्र का पता तथा क्षेत्र में इनकी संख्या के साथ ही अन्य महत्तवपूर्ण जानकारी मिलती है। पार्क अधिकारियों का कहना है कि स्केट रिपोर्ट जंगल में ट्रेपिंग के लिए लगाने वाले कैमरों से ज्यादा बेहतर परिणाम देती है। इसिलिए इस रिपोर्ट को बेहतर व सही माना जाता है।

पिछले वर्ष घोषित किया था क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट

पिछले साल राज्य शासन ने संजय टाइगर रिजर्व में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट/कोर एरिया अधिसूचित कर दिया था, इसके साथ ही, प्रदेश के सभी 6 टाइगर रिजर्व भी क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट/कोर एरिया अधिसूचित की श्रेणी में आ गए हैं। अधिसूचित कोर/ क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट का कुल क्षेत्रफल 812.581 वर्ग किमी है, जिसमें 673.532 वर्ग कि.मी. आरक्षित वन, 71.357 वर्ग कि.मी. संरक्षित वन तथा 67.692 वर्ग मिमी राजस्व क्षेत्र है।

बाघ ने किया भालू का शिकार

संजय टाइगर रिजर्व में डेरा जमाए बाघ ने अब बड़े वन्यजीवों का शिकार करना शुरू कर दिया है। पार्क प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार गश्ती दल को शहडोल रेंज के पास बाघ द्वारा मारे गए एक व्यस्क भालू के अवशेष मिले है। भालू के शिकार से बाघ की उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र में बाघ की बढ़ती चहल-कदमी को देखते हुए ग्रामीणों को घने जंगल में मवेशियों को न चराने की सलाह दी है। क्षेत्र में विचरण कर रहे इस बाघ की गश्ती दल द्वारा लगातार मॉनीटरिंग कर स्कैट इकठ्ठे किए जा रहे है।

संजय टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की गणना 23 से

 संजय टाइगर रिजर्व में फेस-4 के तहत वन्यजीवों की गणना 23 मई से की जाएगी। यह गणना 23 मई से लेकर 31 मई तक चलेगी। पार्क के अधिकारियों का मानना है कि इस वर्ष पार्क परिक्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

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