नेशनल पार्को में अब सीसीटीवी कैमरे से चौकसी 15 अक्टूबर तक रहेंगे पर्यटकों के लिए बंद जबलपुर। प्रदेश के नेशनल पार्को में पर्यटकों की चहल-कदमी के बंद होते ही उसे पार्क प्रबंधन अपने सख्त पहरे में ले लेगा। बारिश के दौरान तीन माह तक पर्यटकों के लिए बंद रहने वाले नेशनल पार्को में शिकारियों पर शिकंजा कसने के लिए वन विभाग ने इस बार नई योजना तैयार की है। इस योजना के तहत सभी नेशनल पार्को में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को स्थाईतौर पार्को की बार्डर में लगाया जाना है। अधिकारिक सूत्रों की मानें तो पार्क के घने और दलदली क्षेत्रों में कुछ सीसीटीवी कैमरों को लगाया जा चुका है। समय-समय पर बदला जाएगा स्थान--- नेशनल पार्क परिक्षेत्र के अन्य क्षेत्रों में लगाए जाने वाले इन सीसीटीवी कैमरों को एक ही स्थान पर लगे नहीं रखा जाएगा। इन्हें रेंडमली तरीके से बदल जाएगा। इसके लिए पार्क में ही कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जिसमें 24 घंटे वन विभाग के कर्मचारी व अधिकारी पार्क की मॉनीटरिंग करेंगे। ये होगा फायदा----- सीसीटीवी कैमरें लगाने से शिकारियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी। सा...
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पन्ना के बाघों को चाहिए और बाघिनें जबलपुर। प्रदेश के पन्ना नेशनल पार्क में बाघ पुर्नवास योजना के तहत कान्हा, बांधवगढ़ से लाई गई मादा बाघ (बाघिन) और पेंच से लाए गए नर बाघ का कुनबा बढ़कर आज 17 के पार हो गया है। लगातार बढ़ रहे इस कुनबे से एक ओर जहां वन विभाग के अधिकारी खुश है तो वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट कुनबे में नर और मादा बाघ के अनुपात गड़बड़ा जाने को लेकर चिंता का विषय बता रहे हैं। पन्ना नेशनल पार्क में वर्तमान में 10 नर बाघ और 6 मादा बाघ है। वाइल्ड एक्सपर्ट की मानें तो एक बाघ कम से कम दो बाघिनों के साथ ब्रीडिंग करता है इस दौरान सभी बाघ-बाघिनें अपनी होम टेरेटरी बनाने में लगे रहते है। इनका अनुपात गड़बड़ाने से पार्क बाघों के संघर्ष की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। लंबे समय से गड़बड़ाए बाघों के अनुपात को सुधारनें के लिए पार्क प्रबंधन और वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों ने पार्क में अन्य नेशनल पार्को से बाघिन लाने की योजना बनाई जा रही है। इस प्रस्ताव को नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भेजा जाना है। यहां से अनुमति मिलने के बाद यहां पर एक या इससे अधिक बाघि...
अब केंद्र की अनुमति में अटके शेर
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मध्यप्रदेश के पालनपुर कूनो में गुजरात के गिर नेशनल पार्क से आने वाले शेरों के लिए सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी तो मिल गई, लेकिन अब केंद्र की अनुमति न मिलने से इनकी शिफ्टिंग अटक गई है। कोर्ट के फैसले के तीन माह बाद भी शिफ्टिंग न हो पाना अब प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। जानकारी मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले मध्यप्रदेश सरकार को 6 माह के अंदर गिर से शेर लाए जाने के लिए कहा था। इसके बाद इंडियन बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (आईबीडब्ल्यू) द्वारा गठित कमेटी के सदस्यों द्वारा इन्हें मध्यप्रदेश लाने की योजना बनाई जानी थी, जिसके तहत 400 शेरों में से मध्यप्रदेश लाए जाने वाले शेरों का चयन किया जाना था। लेकिन अब तक कमेटी ने प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में कोई चर्चा भी नहीं की है। प्रदेश के वन अधिकारियों की एक टीम पीसीसीएफ के नेतृत्व में अगले हफ्ते आईबीडब्ल्यू के अधिकारियों से चर्चा करने जाएगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को अपना फैसला सुनाया था, जिसके बाद से उत्साहित प्रदेश के वन विभाग ने इनकी आगवानी के लिए कून...
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नेशनल पार्को में तैनात होगी पर्यटक पुलिस प्रदेश के नेशनल पार्क में आने वाले खासकर पर्यटक/विदेशी पर्यटकों को पर्यटन के दौरान घटित होने वाली घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए अब पुलिस थाने नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए पार्को में अब पर्यटन चौकी बनाई जाएगी, जहां पर पर्यटकों के लिए पुलिस तैनात होगी, जिसे पर्यटक पुलिस के नाम से जाना जाएगा। पिछले कुछ वर्षो में पार्को में आने वाले विदेशी पर्यटकों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर पर्यटन मंत्रलय ने यह योजना बनाई है। प्रदेश के 7 नेशनल पार्को में पर्यटन चौकी स्थापित की जाएगी। इसमें तैनात पुलिस को पर्यटन फ्रेंडली बनाने के साथ विशेष तौर पर अनुभाषक (भाषा को ट्रांसलेट करने) की ट्रेनिंग दी जा रही है। 7 चौकियों में करीब 156 पुलिसकर्मी को पदस्थ किया जाएगा। चौकी में पदस्थ पुलिसकर्मी पर्यटक की हर समस्या व शिकायत को दर्ज कर मदद- करेंगे। पर्यटक चौकी स्थापित हो जाने से पर्यटक अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकेंगे। ये हैं दिशा-निर्देश पर्यटन मंत्रलय ने सुरक्षित पर्यटन के लिए एक आचार संहिता भी अपनाई है, जो बुनियादी अधिकार जैसे गरिमा, सुरक्षा,...
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प्रदेश में 5 माह में 5 बाघों की मौत जांच रिपोर्ट आना बाकी मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में वन्य प्राणियों की रक्षा खासकर से बाघ का कुनबा बढ़ाने के साथ कूनो पालनपुर में एशियाईटिक शेर लाने की कवायद में जुटा हुआ है। वहीं प्रदेश में जनवरी से लेकर अब तक 5 माह में 5 बाघों की मौत हो गई। प्रदेश के चर्चित बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 5 में से 2 बाघों की मौत केवल 10 दिनों में हो गई। प्रदेश में पेंच, पन्ना व कटनी वन क्षेत्र तीन बाघों की असमय मौत से वन्यप्राणियों के रखवालों की देखरेख पर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। वन्यप्राणियों के विशेषज्ञों का कहना है कि जब हम अपने घर में रह रहे बाघों को सुरक्षित नहीं रह पा रहे तो बाहर से ला रहे अतिथि शेरों की जान माल की सुरक्षा की क्या गारंटी है। अब इस बात पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है कि बाघ की पूर्णत: सुरक्षा और आने वाले शेरों की देखभाल के लिए अधिकारियों पर जवाब देही तय की जाए। ताकि मूक वन्यप्राणी किसी की खामी का शिकार न बन सके। एनटीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश जनवरी से लेकर अब तक 5 माह में 5 बाघों की मौत हो गई। इनमें तीन बाघों की मौत क...
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बांधवगढ़ में बढ़ी शावकों की तादाद पार्क प्रबंधन में उत्साह प्रदेश के बहुचर्चित नेशनल पार्क बांधवगढ़ में शावकों की संख्या बढ़ने की खबर है। इन शावकों की सुरक्षा के लिए मुस्तैद पार्क प्रबंधन जहां इन पर कड़ी पहरेदारी कर रहा है। वहीं पार्क आने वाले पर्यटकों का रुझान शावकों के लिए बढ़ा है तो व्यस्क बाघों के प्रति कम नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक पार्क में विचरण कर रहे बाघों के शावकों की संख्या बढ़कर 30 पहुंच गई है। इसमें 6 माह के उम्र वाले शावकों की संख्या 16 व इससे 6 माह से अधिक उम्र के शावकों संख्या 18 के आसपास बताई जा रही है। पार्क में शावकों की संख्या में इजाफा होने पार्क के अधिकारी उत्साहित नजर आ रहे है। अच्छा हेविटेट है पार्क वन्यप्राणी विशेषज्ञ डॉ. एबी श्रीवास्तव का कहना है कि बांधवगढ़ पार्क में बाघों के खाने रहना व पीने के लिए पानी प्राकृतिक व्यवस्था अच्छी है, जो उनकी तादाद बढ़ाने के लिए सबसे आवश्यक होती है। पहली बार किसी पार्क के क्षेत्र को बाघों की संख्या के कारण बढ़ाने की आवश्यकता पड़ी है। यह बहुत अच्छी बात है कि पार्क में बाघों की संख्या लगातार ...
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सारस के अंडे व बच्चों को सुरक्षित करने पर मिलेगा मानदेय प्रदेश में विलुप्त हो रही सारस पक्षी की प्रजाति को बचाने के लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया ने एक नई योजना बनाई गई है। ‘‘सारस मित्र योजना’’ के नाम से बनाई गई इस योजना को सबसे पहले राजधानी के गोरागांव व बिसनखेढ़ी (जो बड़े तालाब से लगे हुए है) में शुरू किया गया है। योजना के सकारात्मक परिणाम आने के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में शुरू कर दिया जाएगा। हाल ही में भोपाल बर्ड आर्गनाइजेशन द्वारा किए गए सव्रे की आंतरिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि प्रदेश के सारस की संख्या 40 फीसदी ही बची है। इसके बाद सारस को बचाने के लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया ने ‘‘सारस मित्र योजना ’’ के नाम से एक योजना बनाई। प्रदेश में इस योजना को भोपाल बर्ड आर्गनाइजेशन द्वारा संचालित किया जाएगा। इसके तहत हर गांव में 5 लोगों को सारस मित्र बनाया जाएगा। ये सारस मित्र अपने गांव व आसपास में विचरण कर रहे सारस, इनके अंडे व बच्चों को संरक्षित करेंगे साथ ही इनका पूरा डाटा भी रखेंगे। इसके तहत इन्हें हर माह मानदेय दिया जाएगा। एक वर्ष का कार्यकाल पूरा ह...
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कान्हा में बढ़ा कृष्ण मृगों का कुनबा जबलपुर। कान्हा नेशनल पार्क में कृष्णमृगों (ब्लेक बक) का कुनबा बढ़ गया है। कान्हा में कुनबा बढ़ने से पार्क प्रबंधन ने राहत की सांस ली है। जानकारी के मुताबिक कान्हा पार्क में सिवनी राजस्व क्षेत्र से शिफ्ट किए गए ब्लेक बक में से 8 मादाओं ने पिछले सप्ताह जन्म दिया। इनमें एक बच्चे की मौत प्रसव के दौरान फंस जाने से हो गई, लेकिन शेष 7 बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ है। फैंसिंग में रखे गए इन ब्लेक बक के बच्चों की देखभाल के लिए विशेष तौर पार्क कर्मचारियों को तैनात किया गया है। बच्चों के जन्में के बाद इनकी संख्या बढ़कर 31 हो गई है। गौरतलब है कि कान्हा में 1990 से अज्ञात कारणों के चलते ब्लेक बक विलुप्त हो गए थे। इनके पुर्नवास के लिए वन विभाग ने योजना बनाकर पिछले वर्ष जनवरी में करीब 50 ब्लेक बक को सिवनी राजस्व क्षेत्र से केप्चर कर कान्हा में शिफ्ट किया गया था, जिनमें करीब दो दर्जन ब्लेक बक की मौत हो गई थी। इस संबंध में कान्हा के फील्ड डायरेक्टर जेएस चौहान कहते है कि वन विभाग द्वारा शिफ्टिंग की सफलता का यह नतीजा है कि इनका परिवार यहां के माहौल व वातावरण के अनुक...
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प्रदेश के बाघों का होगा हेल्थ चेकअप बीमारी से बचाने वन्यप्राणी विशेषज्ञों ने बनाया प्रोजेक्ट प्रदेश के बाघों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए अब उनका हेल्थ चेकअप किया जाएगा। इंसानों की तरह वन्यप्राणियों में होने वाली गंभीर व सामान्य बीमारियों से बचाने के लिए वन्यप्राणी विशेषज्ञों ने ऐसा ही एक बाघों की सेहत को जांचने के लिए एक प्रोजेक्ट बनाया है। इसके तहत रेस्क्यू किए जाने वाले बाघों का पूरा हेल्थ चेकअप किया जाएगा। प्रोजेक्ट के हेड व फांरेसिक लैब के डीन डॉ. एबी श्रीवास्तव ने कहते है प्रदेशभर में 10 नेशनल पार्क, 25 अभयारण्यों और तीन चिड़ियाघरों में विचरण कर रहे बाघों का हेल्थ चेकअप करना किसी चुनौती से कम नहीं है। लेकिन बीमारी के चलते मौत की भेंट चढ़ रहे बाघों को बचाने के लिए यह हेल्थ चेकअप कारगर होगा। प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में कहीं भी रेस्क्यू किए जाने के दौरान बाघ का पूरा हेल्थ चेकअप किया जाएगा। इससे क्षेत्र में विचरण कर रहे बाघों में कोई भी संक्रमण जैसी बीमा...