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Showing posts from 2016

मिलन की आस पर फिर बाघों में संघर्ष

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4 दिसंबर को हुई कान्हा के मुक्की में घटना कान्हा नेशनल पार्क में ‘मिलन’ को लेकर बाघों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। खूनी संघर्ष के बाद एक बाघ गंभीर रूप से घायल हो गया। मुक्की रेंज में असहाय और कमजोर हालात में पड़े इस जख्मी टाइगर को गश्ती दल ने देखा, तब उन्होंने इसकी खबर प्रबंधन के अधिकारियों को की। आनन-फानन में अधिकारी व पार्क के वेटरनरी डॉक्टर डॉ. अग्रवाल मौके पर पहुंचे। जहां से बाघ को केज में लेकर पार्क के मुक्की रेंज  स्थित एक बाडे में उपचार के लिये रखा गया।  लगातार बिगड़ रही बाघ की हालत को देखते हुये प्रबंधन ने नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विवि के वैज्ञानिकों को बुलवाया। बुधवार को पहुंचे विशेषज्ञ अब बाघ की जान बचाने को लेकर हर संभव प्रयास में जुटे है, लेकिन उसके बचने की उम्मीद कम बताई जा रही है।  बताया जाता है पार्क में विचरण करने वाले टी-28 बाघ एक अन्य बाघ के साथ हुये संघर्ष में घायल हो गया। कोर जोन में गश्ती के दौरान टीम ने देखा कमजोर हालात में पड़े बाघ के पैर और पीठ पर चोटों के काफी निशान है। इसकी सूचना जब अधिकारियों को दी गई, तब अधिकारी,डॉक्टर मौके पर प...

कान्हा में करंट लगाकर मारा बाघ को, फिर काटे पंजे

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3 दिन बाद 6 शिकारी अध जले पंजों सहित गिरफ्तार हर्षित चौरसिया जबलपुर बाघों के लिये प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में पहले बाघ का शिकार फिर उसके बाद अंगों को काटकर ले जाने का मामला सामने आने से पूरे वन विभाग के अफसरों की नींद उड़ा दी है। शिकारियों को दबोचने के लिये वन अमले से लेकर पुलिस और डॉग स्कावड की टीम गांव-गांव सर्चिग में जुटी हुई है। बताया जाता है कि यह घटना कान्हा नेशनल पार्क के बफर जोन के खटिया रेंज के ग्राम मानेगांव की है, जहां पर कल शाम की गश्ती के दौरान वन कर्मियों को एक बाघ का क्षत-विक्षत शव पड़ा हुआ मिला। बाघ के शिकार होने की खबर तत्काल पार्क प्रबंधन के अधिकारियों को दी गई। सूचना के बाद मौके पर वेटरनरी डॉक्टरों और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्टस के साथ मौके की सर्चिग की गई, तो बाघ के चारों पंजे और पेट की खाल गायब थी। ये देखते ही अधिकारियों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह मामला शिकार का है। घटना के तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी अब तक किसी प्रकार का कोई सुराग वन विभाग को अपने मुखबिर से मिली सूचना के बाद घटना स्थल क्षेत्र मानेगांव में एक संदिग्ध को उसके घर से वन विभाग ने दबोचा, दे...

‘काली’ भैंस ने जन्मा ‘सफेद’ पड़ा..!

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हर्षित चौरसिया, जबलपुर आम तौर पर भैंस का रंग काला ही देखा गया है इसमें कम काला या हल्का भूरा जरुर देखने मिल जाता है, लेकिन जबलपुर के रांझी क्षेत्र में एक पशुपालक के घर भैंस ने सफेद रंग के पड़े को जन्म दिया है। पूरी तरह सफेद पड़े को देख कर हर कोई हैरान नजर आ रहा है। इसकी सूचना लगते ही पड़े के रंग को लेकर नानाजी देश मुख पशु चिकित्सा विज्ञान विवि के वैज्ञानिकों की टीम पालक के घर जानकारी लेने के लिये पहुंची। तीन दिन पहले जन्मा आयुध निर्माणी खमरिया के श्रमिक नेता एवं पशुपालक अरुण दुबे ने बताया कि उनकी भैंस ने यह पड़ा दिन तीन दिन पहले जन्मा है। पड़े के शरीर का पूरा रंग सफेद है यह उसका पहला बच्च है।  भैंस की ब्रीडिंग देशी काले भैंसा से कराई गई थी, भैंस की उम्र 5 वर्ष है और वह भी स्वस्थ है। वेटरनर विवि के कुलपति डॉ. प्रयाग दत्त जुयाल कहते है कि इस तरह के केस बहुत कम देखने को मिलते हैं। जन्म लेने वाले पशु में ऐसा डी-न्यूटेशन ऑफ जींस के कारण होता है। इसमें पशु का कलर, बाल एवं आंखों का कलर बदल जाता है। यह हमारे लिये अनुसंधान का विषय है। इसके लिए हमने तीन सदस्यीय वरिष्ठ वैज्ञानिकों की टीम...

अब जंगल के राजा की होगी ‘स्मार्ट’ प्रोफाइल

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बाघों के सरंक्षण के लिये एनटीसीए ने बनाई नई योजना हर्षित चौरसिया, जबलपुर इंसानों की तरह अब बाघों की भी स्मार्ट प्रोफाइल तैयार की जाएगी। देश में बाघों के संरक्षण और सुरक्षा की दिशा में काम कर रहे एनटीसीए ने इसके लिये  मसौदा तैयार कर लिया है। जल्द ही इस योजना पर काम करने संबंधी आदेश जारी किए जाएंगे। बाघ की स्मार्ट प्रोफाइल एक बार तैयार किये जाने के बाद उस बाघ के जन्म, उसकी संतानों की जानकारी, बीमारी, उसके द्वारा मानवों पर हमले, उसके व्यवहार सहित वर्तमान तक की स्थिति के बारे में जानकारी दर्ज होगी। देश के सभी नेशनल पार्कों, अभयारण्यों और वनों में विचरण कर रहे बाघों की प्रोफाइल वन विभाग के अफसर आॅनलाइन कहीं भी देखकर उनके बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे। प्रोफाइल के जरिए बाघों को संरक्षित करने की यह नई योजना को लेकर राष्टÑीय बाघ प्राधिकरण काम शुरू कर दिया गया है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक राष्टय बाघ प्राधिकरण और वर्ल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया देहरादून सहित वन विभाग के उच्च अधिकारियों की बैठक में बाघों की प्रोफाइल तैयार करने पर सहमति भी जताई है। हालांकि इस काम में काफी समय लगे...

जबलपुर में बनेगा टाइगर का क्लोन

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 वेटरनरी यूनिवर्सिटी ने शुरू की कवायद हर्षित चौरसिया, जबलपुर भारत में बाघों की घटती संख्या के मद्देनजर जंगल के राजा की इस प्रजाति को बचाने पशु वैज्ञानिकों ने अब इसका क्लोन बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। प्रदेश की नानाजी देशमुख वेटरनरी युनिवर्सिटी जल्द ही ‘मिशन टाइगर क्लोन’ के लिए तकनीक व रिसर्च का आदान-प्रदान करने देश के सबसे बड़े संस्थान वाइल्ड लाइफ ऑफ इंडिया देहरादून के साथ ‘एमओयू’ करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में विशेषज्ञों के बीच अब तक हुई बैठकों में सकारात्मक संकेत मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरु होने वाला है। कैसे बनता है.. किसी भी पशु का क्लोन तैयार करने के लिए वैज्ञानिक उस नस्ल के पशु के सोमेटिक सेल न्यूक्लियर निकालकर उसे फर्टीलाइज कराने की प्रक्रिया के बाद उससे भ्रूण तैयार कर सकते हैं। यदि इसे सुरक्षित रखा जाए, तो भविष्य में उक्त जीव की प्रतिरूपत पैदा किया जा सकता है। लाभ क्या होगा.. क्लोन से तैयार जीव में उन सभी गुणों का समावेश होता है, जिससे क्लोन के लिये कोशिकाएं ली गई हो। यह नस्ल को सुरक्षित रखने के लिये सबसे उन्नत तरीका भ...

‘विध्यां’ की मस्तानी चाल पर ‘प्रणय’ की आस

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मुकुंदपुर से लौटकर हर्षित चौरसिया करीब 2 सौ किलो वजनी ‘विंध्या’  की लचक भरी मस्तानी चाल के हर पहलु पर ‘प्रणय’ की आस लगाए चार फीट दूर बैठे ‘रघु’ को देखने का कौतूहल बढ़ता जा रहा था। दोनों के बीच में लोहे की जाली थी, लेकिन विंध्या की चहल-कदमी में लाचारी भी थी और खूंखारपन भी। यह दृश्य था  रीवा स्थित मुकुंदपुर व्हाइट टाईगर सफारी के अंदर मोहन व्हाइट टाइगर सफारी का, जहां विंध्या  (मादा सफेद बाघ)और  रघु (नर सफेद बाघ) के देखने पहुंचे पर्यटक रोमांचित हो रहे थे। खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयास से बनाई गई मुकुंदपुर सफारी को देखने जबलपुर से पत्रकारों का दल रीवा गया था। 2023 तक पूरा हो जाएगा सफारी का कार्य सफारी के रेंज ऑफीसर एवं जनसंपर्क अधिकारी दारा सिंह बघेल ने बताया कि 250 एकड़ में फैली सफारी में तेजी से बाड़ों को कम्लीट करने का कार्य किया जा रहा है। सफारी में 41 बाड़े बनाया जाना है, जिनमें से 5 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 11 में काम चल रहा है और 25 बनना बाकी है। सफेद बाघों को देखने के लिये लगातार पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। रीवा ने दिया दुनिया का पहला व्हा...

जंगल में अब बाघों की ‘वॉटर’ फाइट

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  वन्यजीवों के कंठ तर करने में वन अफसरों को छूट रहे पसीनें हर्षित चौरसिया,  जबलपुर  गर्मी के मौसम में नलों में, कुओं में पानी भरने को लेकर महिलाओं के बीच झोंटा पकड़ तो आमतौर पर देखने को मिलता है। लेकिन जंगलों में अब बाघों के बीच इन दिनों पानी को लेकर जबर्दस्त लड़ाई देखने को मिल रही है। नतीजन पिछले कुछ माह में संघर्ष में 6 बाघ मौत के मुंह में चले गये।  ये वहीं बाघ थे, जो कि पानी की तलाश में दूसरे बाघों के इलाके में पहुंच जाते थे। वन अफसर इस बात को मानते है कि गर्मी में पार्क में पानी की उपलब्धता वाले स्थानों में पानी सूखने के साथ अब ये बाघ पानी की तलाश में गांवों ओर दूसरे बाघों के इलाके में प्यास बुझाने पहुंच रहे हैं। नतीजन अपने शावकों के साथ घूम रही बाघिनों और पानी वाले इलाकों में पहले से कब्जा कर रखे बाघों के बीच संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही है और अंतत: परिणाम मौत में तब्दील होता दिखाई दे रहा है। प्रदेश भर के 8 नेशनल पार्को और 25 अभयारण्यों में जल स्त्रोत सूखने से वन महकमा अस्थाई जल स्त्रोतों से वन्यजीवों के कंठ तर करने में पूरी ताकत झोंकने...