मिलन की आस पर फिर बाघों में संघर्ष
कान्हा नेशनल पार्क में ‘मिलन’ को लेकर बाघों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। खूनी संघर्ष के बाद एक बाघ गंभीर रूप से घायल हो गया। मुक्की रेंज में असहाय और कमजोर हालात में पड़े इस जख्मी टाइगर को गश्ती दल ने देखा, तब उन्होंने इसकी खबर प्रबंधन के अधिकारियों को की। आनन-फानन में अधिकारी व पार्क के वेटरनरी डॉक्टर डॉ. अग्रवाल मौके पर पहुंचे। जहां से बाघ को केज में लेकर पार्क के मुक्की रेंज स्थित एक बाडे में उपचार के लिये रखा गया। लगातार बिगड़ रही बाघ की हालत को देखते हुये प्रबंधन ने नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विवि के वैज्ञानिकों को बुलवाया। बुधवार को पहुंचे विशेषज्ञ अब बाघ की जान बचाने को लेकर हर संभव प्रयास में जुटे है, लेकिन उसके बचने की उम्मीद कम बताई जा रही है।4 दिसंबर को हुई कान्हा के मुक्की में घटना
बताया जाता है पार्क में विचरण करने वाले टी-28 बाघ एक अन्य बाघ के साथ हुये संघर्ष में घायल हो गया। कोर जोन में गश्ती के दौरान टीम ने देखा कमजोर हालात में पड़े बाघ के पैर और पीठ पर चोटों के काफी निशान है। इसकी सूचना जब अधिकारियों को दी गई, तब अधिकारी,डॉक्टर मौके पर पहुंचे और बाघ को रेस्क्यू कर मुक्की रेंज में स्थित इनक्लोजर में रखकर उपचार शुरू किया गया। चोट के मुताबिक बाघों के बीच करीब 5 दिन पहले जमकर संघर्ष होना पाया गया है। बाघ की हालत लगातार बिगड़ने पर वेटरनरी विवि जबलपुर से डॉ.व्हीपी चनपूरिया, डॉ.अमोल रोकड़े को बुलाया गया है, जिनकी निगरानी में बाघ का उपचार जारी है। लेकिन बाघ के बचने की उम्मीद कम होने को देखते हुये वन अधिकारी इस चिंता में है कि यदि इस बाघ ने दम तोड़ दिया, तो हम एक व्यस्क बाघ खो देंगे। बचाने को लेकर लगातार विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में डॉक्टर ईलाज करने में जुटे है।

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