जंगल में अब बाघों की ‘वॉटर’ फाइट
वन्यजीवों के कंठ तर करने में वन अफसरों को छूट रहे पसीनें
हर्षित चौरसिया, जबलपुर
गर्मी
के मौसम में नलों में, कुओं में पानी भरने को लेकर महिलाओं के बीच झोंटा
पकड़ तो आमतौर पर देखने को मिलता है। लेकिन जंगलों में अब बाघों के बीच इन
दिनों पानी को लेकर जबर्दस्त लड़ाई देखने को मिल रही है। नतीजन पिछले कुछ
माह में संघर्ष में 6 बाघ मौत के मुंह में चले गये। ये वहीं बाघ थे, जो कि
पानी की तलाश में दूसरे बाघों के इलाके में पहुंच जाते थे। वन अफसर इस बात
को मानते है कि गर्मी में पार्क में पानी की उपलब्धता वाले स्थानों में
पानी सूखने के साथ अब ये बाघ पानी की तलाश में गांवों ओर दूसरे बाघों के
इलाके में प्यास बुझाने पहुंच रहे हैं। नतीजन अपने शावकों के साथ घूम रही
बाघिनों और पानी वाले इलाकों में पहले से कब्जा कर रखे बाघों के बीच संघर्ष
की घटनाएं सामने आ रही है और अंतत: परिणाम मौत में तब्दील होता दिखाई दे
रहा है। प्रदेश भर के 8 नेशनल पार्को और 25 अभयारण्यों में जल स्त्रोत
सूखने से वन महकमा अस्थाई जल स्त्रोतों से वन्यजीवों के कंठ तर करने में
पूरी ताकत झोंकने में व्यस्त दिखाई दे रहा है। जंगलों में सूखते जल
स्त्रोतों और पानी के बीच बाघों के बीच चल रहे संघर्ष ने वन अफसरों को
टेंशन में डाल दिया है। टेंकरों और सोलर पंपों का सहारा
प्रदेश के चर्चित नेशनल पार्क कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच में सबसे ज्यादा खराब स्थिति बांधवगढ़ और पेंच पार्क की है। यहां पर मौजूद प्राकृतिक जलस्त्रोतों में से आधे से अधिक सूख चुके हैं। वन विभाग ने पार्को के अंदर अब सूखे जलस्त्रोतों को भरने के लिये 24 घंटे टेंकर और सोलर पंपों के जरिये चलने वाले पंपों का सहारा लिया है। वहीं कुछ स्थानों में अस्थाई तौर पर पाईप लाइन बिछाकर पानी के कुंडों को भरा जा रहा है।क्या कहते है पार्क के अधिकारी
बांधवगढ़ नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के रमन कहते हैं कि पार्क में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिये हमने कुछ ट्यूबबेल और टेंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की है। इसके लिये हमने कर्मचारियों का एक अलग दस्ता भी तैनात किया है, जो 24 घंटे टेंकरों के माध्यम से सूखे कुंडों को भरने का काम कर रहा है।पेंच के फील्ड डायरेक्टर शुभरंजन सेन के मुताबिक पार्क में इस बार पानी के स्त्रोत जल्दी ही सूख गये है। वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिये हम सोलर पंपों के साथ अन्य साधनों का सहारा ले रहे हैं।
शुभरंजन सेन, फील्ड डायरेक्टर पेंच नेशनल पार्क
Comments
Post a Comment