‘विध्यां’ की मस्तानी चाल पर ‘प्रणय’ की आस
मुकुंदपुर से लौटकर हर्षित चौरसिया
करीब 2 सौ किलो वजनी ‘विंध्या’ की लचक भरी मस्तानी चाल के हर पहलु पर ‘प्रणय’ की आस लगाए चार फीट दूर बैठे ‘रघु’ को देखने का कौतूहल बढ़ता जा रहा था। दोनों के बीच में लोहे की जाली थी, लेकिन विंध्या की चहल-कदमी में लाचारी भी थी और खूंखारपन भी। यह दृश्य था रीवा स्थित मुकुंदपुर व्हाइट टाईगर सफारी के अंदर मोहन व्हाइट टाइगर सफारी का, जहां विंध्या (मादा सफेद बाघ)और रघु (नर सफेद बाघ) के देखने पहुंचे पर्यटक रोमांचित हो रहे थे। खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयास से बनाई गई मुकुंदपुर सफारी को देखने जबलपुर से पत्रकारों का दल रीवा गया था।2023 तक पूरा हो जाएगा सफारी का कार्य
सफारी के रेंज ऑफीसर एवं जनसंपर्क अधिकारी दारा सिंह बघेल ने बताया कि 250 एकड़ में फैली सफारी में तेजी से बाड़ों को कम्लीट करने का कार्य किया जा रहा है। सफारी में 41 बाड़े बनाया जाना है, जिनमें से 5 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 11 में काम चल रहा है और 25 बनना बाकी है। सफेद बाघों को देखने के लिये लगातार पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।रीवा ने दिया दुनिया का पहला व्हाइट टाईगरबताया जाता है कि रीवा के जंगलों में सबसे पहला सफेद बाघ वर्ष 1951 में पकड़ा गया और इसका नाम ‘मोहन’ रखा गया। 1963 में रीवा से दिल्ली राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में राजा-रानी नामक सफेद बाघों को लाया गया। सन1963 से 1979 तक पूरे विश्व में केवल 8 प्राणी उद्यानों को सफेद बाघ मिले। इनमें देश में 55 चिड़ियाघरों में केवल राष्ट्रीय प्राणी उद्यान दिल्ली, अलीपुर प्राणी उद्यान, कोलकाता, नेहरू प्राणी उद्यान, हैदराबाद तथा असम राज्य प्राणी उद्यान, गुवाहाटी में सफेद बाघ रहे।
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