जबलपुर में बनेगा टाइगर का क्लोन

 वेटरनरी यूनिवर्सिटी ने शुरू की कवायद

हर्षित चौरसिया, जबलपुर

भारत में बाघों की घटती संख्या के मद्देनजर जंगल के राजा की इस प्रजाति को बचाने पशु वैज्ञानिकों ने अब इसका क्लोन बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। प्रदेश की नानाजी देशमुख वेटरनरी युनिवर्सिटी जल्द ही ‘मिशन टाइगर क्लोन’ के लिए तकनीक व रिसर्च का आदान-प्रदान करने देश के सबसे बड़े संस्थान वाइल्ड लाइफ ऑफ इंडिया देहरादून के साथ ‘एमओयू’ करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में विशेषज्ञों के बीच अब तक हुई बैठकों में सकारात्मक संकेत मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरु होने वाला है।

कैसे बनता है..

किसी भी पशु का क्लोन तैयार करने के लिए वैज्ञानिक उस नस्ल के पशु के सोमेटिक सेल न्यूक्लियर निकालकर उसे फर्टीलाइज कराने की प्रक्रिया के बाद उससे भ्रूण तैयार कर सकते हैं। यदि इसे सुरक्षित रखा जाए, तो भविष्य में उक्त जीव की प्रतिरूपत पैदा किया जा सकता है।

लाभ क्या होगा..

क्लोन से तैयार जीव में उन सभी गुणों का समावेश होता है, जिससे क्लोन के लिये कोशिकाएं ली गई हो। यह नस्ल को सुरक्षित रखने के लिये सबसे उन्नत तरीका भी माना जाता है।

और अब तक जो हुआ है

1996 में वैज्ञानिकों ने तकनीक और अनुभवों का इस्तेमाल कर डॉली (भेड़) का क्लोन तैयार किया था। इसमें 246 बार किये गए प्रयोग में कई प्रयास के बाद डॉली सफलता के रूप में मिली थी। इससे पूर्व वैज्ञानिक गौर, ऊंट, खच्चर पर यह प्रयोग कर चुके हैं। वहीं भारत में मानव क्लोन पर रिसर्च प्रतिबंधित है।
हेड क्लोनिंग प्रक्रिया का प्रयोग कर टाइगर जैसे वन्यजीव का क्लोन बनाने पर काम शुरू करने जा रहे हैं। यदि हमारे वैज्ञानिकों की रिसर्च और तकनीक के परिणाम सार्थक हुये तो यह वाइल्ड लाइफ रिसर्च और वेटरनरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि होगी।
                                       डॉ. प्रयाग दत्त जुयाल, कुलपति वेटरनरी विवि, जबलपुर

Comments

Popular posts from this blog

बाघों के गढ़ खोजी जा रही तितलियों की प्रजातियां

बाघ शावकों की सुरक्षा के लिए धारा 144

तीन रूप में दर्शन देती हैं माता हरसिद्धि