रेडियो कॉलर ने कर दिए थे बाघिन के गले में घाव
रेस्क्यू कर वेटरनरी डॉक्टर डॉ. संजीव गुप्ता ने दिया उपचार
पन्ना। पन्ना बाघ पुर्नस्थापना योजना के तहत कान्हा से लाई गई अनाथ बाघिन टी-4 की तीसरे लिटर की संतान पी-433 का रेडियो कॉलर टाइट हो गया था। रेडियो कॉलर टाइट होने की बजह से बाघिन को परेशानी हो रही थी। पूर्व में इस बाघिन को दिनांक 11.12.2014 को रेडियो कॉलर किया गया था उस समय इसकी उम्र महज ढेड़ वर्ष थी। इसके रेडियो कॉलर को हटाने हेतु काफी समय से प्रयास किया जा रहा था। किन्तु वह सही स्थान पर लोकेट नही हो पा रही थी। शनिवार हिनौता परिक्षेत्र के गंगऊ बीट में लोकेशन मिलने पर तत्काल रेस्क्यू दल द्वारा मौके पर पहुंच कर बाघिन को सफलतापूर्वक ट्रंकुलाइज कर रेडियो कॉलर निकाला गया। रेडियो कॉलर टाइट होने के कारण उसके गले में 02 छोटे-छोटे घाव पाये गये जिसका मौके पर उपचार किया गया। आवश्यक उपचार उपरान्त बाघिन को स्वछंद विचरण हेतु स्वस्थ्य हालत में वन क्षेत्र में छोड़ा गया तथा उसकी निगरानी निरंतर जारी है। बाघिन का स्वास्थ्य सामान्य पाया गया। पूरी कायर्वाही क्षेत्र संचालक के मार्गदर्शन में जराण्डे ईश्वर रामहरि, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व के नेतृत्व में डॉ. संजीव कुमार गुप्ता, वन्यप्राणी चिकित्सक के तकनीकी मार्गदर्शन में पूर्ण की गई। कायर्वाही में डॉ. आरके गुरुदेव, सहायक संचालक पन्ना एवं अमर सिंह, प्रभारी परिक्षेत्र अधिकारी हिनौता, हाथी महावतों एवं अन्य कमर्चारियों का सराहनीय योगदान रहा।
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