कान्हा टाइगर रिजर्व में तेंदुए की रेस्क्यू मुहिम: शिकारियों के फंदे से बचाया गया तेंदुआ

कान्हा टाइगर रिजर्व में एक तेंदुआ शिकारियों द्वारा बिछाए गए तार के फंदे में फंस गया, लेकिन वन विभाग की तत्परता ने उसकी जान बचा ली। गश्ती दल के कर्मचारियों ने जब तेंदुए की दर्द से कराहने की आवाज सुनी, तो वे तुरंत मौके पर पहुंचे और फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी को सूचित किया। इसके बाद, फील्ड डायरेक्टर के नेतृत्व में एक रेस्क्यू टीम तैयार की गई, जिसमें वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल और अन्य एक्सपर्ट शामिल थे।

रेस्क्यू ऑपरेशन की त्वरित सफलता

टीम ने महज 30 मिनट में रेस्कयू ऑपरेशन के दौरान तेंदुए को बेहोश किया और इसके बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर जब यह पाया गया की वह  स्वस्थ  है इसके बाद  उसे जंगल में वापस छोड़ दिया गया। फील्ड डायरेक्टर ने रेस्क्यू टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि वन अपराध दर्ज कर लिया गया है और इसकी आगे की जांच जारी है।  एक्सपर्ट  डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि ऐसे मामलों में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। रेस्क्यू में देरी से तेंदुए के शरीर में घाव हो सकते थे या तनाव की वजह से उसकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने बताया कि तेंदुआ पूरी तरह से स्वस्थ पाया गया और खुद ही घने जंगल में वापस लौट गया।

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप आईआई: यह घटना बुधवार की सुबह कक्ष क्रमांक-1438 में हुई, जब गश्ती दल को तेंदुए की कराह सुनाई दी। मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि तेंदुआ खेत की बागड के पास बुरी तरह से फंसा हुआ था। सूचना मिलते ही रेस्क्यू दल ने तेजी से कार्रवाई की।

  • 15 मिनट में टीम की पहुंच: सूचना मिलते ही वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल और उनकी एक्सपर्ट टीम तत्काल आवश्यक साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंची।
  • बिजली की फुर्ती से कार्रवाई: टीम ने तुरंत तेंदुए को ट्रैक किया और उसे बेहोश किया।
  •  कटर के उपयोग से टीम ने कुछ ही मिनटों में तार के जटिल फंदे को काटकर तेंदुए को मुक्त कर दिया।

रेस्क्यू टीम की सराहना: फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र

मणि त्रिपाठी
ने रेस्क्यू टीम की त्वरित और सफल कार्रवाई की सराहना की, और बताया कि इस कार्यवाही के बाद वन अपराध दर्ज कर लिया गया है, ताकि कड़ी कार्रवाई की जा सके।


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