बांधवगढ़ में कुनबा बढाएंगे सतपुड़ा से आए गौर


 5 गौरों का सफलतापूर्वक, ट्रांसलोकेशन, दूसरा चरण शुरू

जबलपुर| 24 जनवरी, 2026

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) के लिए आज का दिन जैव-विविधता के संरक्षण की दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि लेकर आया। 'गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम' के दूसरे चरण की सफल शुरुआत करते हुए, आज सुबह सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए 5 गौरों को बांधवगढ़ के कलवाह परिक्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

सफलतापूर्वक संपन्न हुआ पहला पड़ाव

शुक्रवार को प्रातः 9:30 से 10:00 बजे के बीच, क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय और उपसंचालक योहान कटारा की  उपस्थिति में इन गौरों को बाड़े में मुक्त किया गया। इस समूह में 01 नर और 04 मादा गौर शामिल हैं।

इन गौरों को कल यानी 22 जनवरी को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना वन क्षेत्र से भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम और क्षेत्र संचालक राखी नंदा के नेतृत्व में कैप्चर किया गया था।

क्यों खास है यह मिशन?

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और मध्य प्रदेश वन विभाग के इस संयुक्त प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य गौरों की जनसंख्या में आनुवंशिक विविधता (Genetic Variability) सुनिश्चित करना है।

 * प्रोजेक्ट का लक्ष्य: इस चरण में कुल 27 गौरों को लाने का लक्ष्य है।

 * इतिहास: बांधवगढ़ में 1990 के दशक में गौर विलुप्त हो गए थे।

 * सफलता की कहानी: 2010-11 में कान्हा से लाए गए 50 गौरों की बदौलत आज यहाँ गौरों की संख्या 191 के पार पहुँच गई है।

 * पिछला चरण: फरवरी 2025 में प्रथम चरण के तहत 22 गौर सफलतापूर्वक लाए जा चुके हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: 9 परिवहन दल तैनात

गौरों के सुरक्षित स्थानांतरण के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। 22 से 25 जनवरी तक चलने वाले इस ऑपरेशन के लिए 09 विशेष परिवहन दल गठित किए गए हैं। प्रत्येक दल में वन्यप्राणी चिकित्सक, वन क्षेत्रपाल और सुरक्षाकर्मियों सहित 10 सदस्य और 4 वाहन शामिल हैं, जो पल-पल की निगरानी कर रहे हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि "यह अभियान न केवल बांधवगढ़ में गौरों की संख्या को सुदृढ़ करेगा, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और जैव-विविधता के संरक्षण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।"


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