कभी बाघ विहीन रहे पन्ना टाइगर रिजर्व में अब 55 बाघों का कुनबा

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। वर्ष 1994 में बाघों की मौजूदगी के चलते टाइगर रिजर्व का दर्जा पाने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्ष 2009 में ऐसा समय आया कि यहां पर एक भी बाघ नहीं बचा। टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया। इसके बाद वन विभाग के अफसरों और सरकार की कवायद से शुरू हुआ बाघ पुर्न: स्थापना का अभियान। 10 साल बाद आज पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के कुनबा में संख्या बढ़कर 55 तक पहुंच गई है।

 मार्च 2009 में बांधवगढ़-कान्हा से आई थी टाइग्रेस

बताया जाता है कि मार्च-2009 में बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व से 2 बाघिन को पन्ना लाया गया। इन्हें टी-1 और टी-2 नाम दिया गया। इसके बाद 6 दिसम्बर को पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ लाया गया, जिसका नामकरण टी-3 किया गया। इस बाघ का पन्ना टाइगर रिजर्व में मन नहीं लगा और वह वापस दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ा। हर वक्त सतर्क पार्क प्रबंधन ने 19 दिन तक बड़ी कठिनाई और मशक्कत से इसका लगातार पीछा किया और 25 दिसम्बर को इसे बेहोश कर पुन: पार्क में ले आये।
 

 बाघ टी-3 को ढूंढना था मुश्किल


 तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर. श्रीनिवास मूर्ति के मुताबिक बाघ पुर्न:स्थापना बहुत ही कठिन काम था। हमें कदम-कदम पर असफलताएं भी मिलीं पर हमने हार नहीं मानी। एक के बाद एक प्रयोग करते रहे। स्थानीय लोगों को भी जागरूक करते रहे। जो परिणाम आये, वो आज विश्व के सामने हैं। बाघ टी-3 को दूसरी बार ढूंढना निहायत ही मुश्किल काम था। उसको पहनाए गए वीएचएफ कॉलर से कोई सिग्नल नहीं मिल रहे थे। हमारे स्टॉफ के लोग न केवल चारों दिशाओं में दौड़े, बल्कि 24 घंटे सतर्क रहे। कई उपाय आजमाने के बाद अंततोगत्वा हमने एक ट्रिक अपनाई। हमने बाघिन का मूत्र क्षेत्र के पेड़ों पर छिड़कवाया, जिससे आकर्षित होकर टी-3 हमें वापस मिला। प्राकृतिक रूप से बाघ इस गंध के सहारे ही बाघिन तक पहुंचता है।
 

बाघ टी-3 के वापस टाइगर रिजर्व में लौटने के बाद बदला इतिहास 


बाघ टी-3 के वापस टाइगर रिजर्व में लौटने के बाद  वर्ष 2010 में बाघिन टी-1 ने अप्रैल में और टी-2 ने अक्टूबर में शावकों को जन्म दिया। अब रिजर्व में बाघ की संख्या 8 हो गई थी। टी-1 ने पहली बार 16 अप्रैल को शावकों को जन्म दिया था। यह दिन आज भी पन्ना टाइगर रिजर्व में जोर-शोर से मनाया जाता है। इसके बाद वन विभाग द्वारा 5 वर्षीय बाघों का एक जोड़ा भी कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से यहां लाया गया। वर्ष 2013 में भी पेंच से एक बाघिन को पन्ना स्थानांतरित किया गया। अनुमानत: पन्ना में अब तक 70 बाघ हो चुके हैं, जिनमें से कुछ विंध्य और चित्रकूट क्षेत्र के जंगलों में भी पहुंच चुके हैं। अब पन्ना टाइगर पार्क रिजर्व में 55 बाघ हैं।
 

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