प्रदेश में पहला प्रयोग, वैज्ञानिकों की मेहनत लाई रंग
हर्षित चौरसिया, जबलपुर
देश में गायों की देशी उन्नत नस्ल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी (वीयू)के वैज्ञानिकों के प्रयास से देशी गाय की कोख से गायों की सबसे उन्नत नस्ल साहीवाल का बछड़ा जन्मा। अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल और अनुभवी वैज्ञानिकों द्वारा प्रदेश में ऐसा प्रयोग पहली बार किया गया है। देशी गाय की कोख से जन्मे बछड़े के साथ उसकी सेरोगेट मदर (सिर्फ जन्म देने वाली मां) पूरी तरह से स्वस्थ है।
3.5 करोड़ का है प्रोजेक्ट
वीयू के आईपीआरओ डॉ. ओपी श्रीवास्तव बताते हैं कि गोकुल मिशन के अंतर्गत किया गया यह प्रोजेक्ट 3.5 करोड़ रुपए का है जिस पर वेटरनरी के वैज्ञानिक रिसर्च करने में लगे हुए हैं। पहला प्रयोग सफल हो चुका है अब आगे इसे बड़े स्तर पर करने की तैयारी की जा रही है।
सम्मानित होंगे वैज्ञानिक
वीयू में हुए इस सफल प्रयोग में डॉ. मनीष शुक्ला के साथ डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. नीरज वर्मा, डॉ. आसिया सुरेश, डॉ. सलीमा अहमद कावरी, डॉ. एकनाथ, डॉ. ललीता मोहन, डॉ. संदीप रहंगडाले ने काम किया। इस पूरी टीम को वीयू के कुलपति स्थापना दिवस पर सम्मानित करेंगे।
8 दिन का भ्रूण (एम्ब्रीयो) डाल देते हैं कोख में
वीयू के वैज्ञानिक डॉ. मनीष शुक्ला ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए हम उन्नत नस्ल की गाय से 8 दिन का भ्रूण निकालकर उसे देशी गाय के गर्भाशय में डाल देते हैं। पहले प्रयोग में हमने साहीवाल नस्ल की गाय का चयन कर उसका एम्ब्रीयो देशी गाय के गर्भाशय में डाला था। जिसके बाद देशी गाय ने स्वस्थ बछड़े को जन्म दे दिया है।
क्या कहते है विवि के कुलपति
वीयू के कुलपति डॉ. प्रयाग दत्त जुयाल कहते हैं कि विवि के वैज्ञानिक, देशी गायों की उन्नत नस्लों की संख्या बढ़ाने पर काम रहे हैं। इसमें यह प्रयोग सफल होना बड़ी उपलब्धि है। इस तकनीक से हम कम दुग्ध उत्पादन करने वाली गायों को इसमें काम में लाने के साथ बड़ी संख्या में उन्नत नस्ल की गायों की संख्या बढ़ा सकते हैं।
Feeling proud
ReplyDeleteभारतीय मूल के गोवंश को बचाने एवं उनकी संख्या वृद्धि करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये।गो-वैज्ञानिक इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं,जो समय की आवश्यकता है। कम दूध देने वाली वाली गाय जब गर्भधारण की स्थिति में हो उस समय उन्नत नस्ल के वुल(सांड)जिसकी माँ ने सर्वाधिक दूध दिया हो( भारतीय मूल की साहीवाल,गीर,रेड सिंधी अथवा राठी गाय)उससे गाय का गर्भाधान कराने से अगली जनरेशन उन्नत किस्म की दुधारू बछिया होगी तथा यदि बछड़ा होगा तो वह भी आगे बड़ा होकर अच्छा वुल होगा।हम प्रदेश की गोशालाओं में इस नैसर्गिक प्रक्रिया को प्रोत्साहन दे रहे हैं।
ReplyDelete