आसान नहीं था कान्हा ‘राजा’ को पकड़ना
4 हाथी, 40 कर्मियों की टीम ने एक घंटे में पूरा किया ऑपरेशन
हर्षित चौरसिया, जबलपुर
कान्हा टाइगर रिजर्व के खूंखार व्यस्क खूखार बाघ को पकड़ना आसान नहीं था। 200 किलो वजनी इस बाघ को पकड़ने में चार हाथी और चालीस लोगों का स्टाफ जुटा रहा। करीब एक घंटे के ऑपरेशन के बाद बाघ पर नियंत्रण पाया जा सका। इस बाघ को कल ही उड़ीसा के सतकोशी टाइगर रिजर्व भेजने की कार्रवाई की गई। इस बाघ को कान्हा कोर जोन के घने इलाके से हाथियों के माध्यम से ट्रैप कर केज में डालने की कार्रवाई पूरी हुई। यह पूरा ऑपरेशन देहरादून से आए विशेषज्ञ व कान्हा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संजय शुक्ला, डिप्टी डायरेक्टर केएस भदौरिया, बफर जोन की डिप्टी डायरेक्टर अंजना सुचिता तिर्की के मार्गदर्शन में वेटरनरी डॉक्टर डॉ. संदीप अग्रवाल, पेंच टाइगर रिजर्व के डॉ. अखिलेश के मार्गदर्शन में पूरी हुई। ऑपरेशन में डॉ. के रमेश वरिष्ठ वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, डॉ. राकेश शुक्ला अनुसंधान अधिकारी, डॉ. अखिलेश मिश्र वन्यप्राणी चिकित्सक पेंच टाइगर रिजर्व, एसके खरे, एसके सिन्हा, रंजीत सिंह उइके, एसके मिश्र, एसके सेन्द्राम सहायक संचालक परिक्षेत्र अधिकारीगण एवं कान्हा टाईगर रजिर्व के कर्मचारियों ने सहयोग दिया।
टेरेटरी के लिए था संघर्षरत
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो साढ़े तीन साल का यह बाघ पार्क में टेरेटरी बनाने की कवायद में जुटा हुआ था। टेरेटरी बनाने के चलते कई बार इसका संघर्ष दूसरे बाघों से हुआ था। इस दौरान एक बाघ शावक को भी इसने मार दिया था। लिहाजा वन विभाग ने इसकी मॉनीटरिंग के बाद इसे हेल्दी पाते हुए इसे भेजने का प्रस्ताव दिया था।




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