विदेशी हाईब्रीड गाय को ‘गौमाता’ नहीं मान रहे अखिलेश्वरानंद

 मिलिट्री फार्म की गायों को सरकार के लेने पर नया विवाद

हर्षित चौरसिया, जबलपुर
भारतीय मूल के गौ-वंश को संरक्षित करने की दिशा में काम रहे गौ-संवर्धन बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद ने अब नॉन इंडियन हाईब्रीड काऊज पर आपत्ति जाहिर की है। सरकार द्वारा मिलिट्री फार्म की गाय को लिए जाने की बात सामने आने पर यह नया विवाद खड़ा होता दिखाई दे रहा है। फार्म की गाय को वे भारतीय मूूल का गौ-वंश नहीं मानते हैं।

कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अखिलेश्वरानंद ने  कहा कि वे भारतीय गौ-वंश के संरक्षण के लिए काम कर रहे है। फार्म पर जो गाय है वे नॉन इंडियन हाईब्रीड काउज है इन्हें गाय तो कहा जा सकता है, लेकिन इन्हें गौ-वंश की संज्ञा नहीं दी जा सकती है।

ए-1 मिल्क है स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

उन्होंने कहा कि यह बात वैज्ञानिकों द्वारा रिसर्च में सामने आ चुकी है कि ए-1 मिल्क स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। देशी गायों से मिलने वाला ए-2 मिल्क ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। ऐसे में किसान, पशुपालक इन हाइब्रीड गायों को ले तो लेंगे, लेकिन वह जनसामान्य के लिए हितकर नहीं है।

गौ-शालाओं की जगह गौ-सदन में छोड़ दें स्वतंत्र

अखिलेश्वरानंद का मानना है कि हाईब्रीड गायों से मिलने वाला दूध स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। लिहाजा इन्हें गौ-शालाओं में नहीं बल्कि गौ-सदन में स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सागर में 36 सौ एकड़ जमीन है ऐसे में इस जमीन को व्यवस्थित कर यहां पर इन्हें छोड़ना उचित होगा।

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