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Showing posts from October, 2012
प्रदेश में लगेगा दूसरा कार्बन फ्लक्स टॉवर प्रदेश में जल्द ही दूसरा कार्बन फ्लक्स टॉवर लगाया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय सुदूर संवेदन संस्थान (इसरो) हैदराबाद द्वारा मप्र के तीन जिले मंडला, डिंडौरी और शहडोल में सव्रे शुरू कर दिया गया है। सव्रे पूरा होने के बाद इनमें एक जिले को टॉवर के लिए चयनित कर लिया जाएगा। इसके लगने के बाद प्रदेश में कार्बन फ्लक्स के टॉवरों की संख्या दो हो जाएगी। गौरतलब है कि प्रदेश के वनमंत्री ने हाल में ही 31 जनवरी को लगा पहला टॉवर  प्रदेश में  पहला कार्बन फ्लक्स टॉवर बैतूल जिले के तावडी वन क्षेत्र में  राष्ट्रीय कार्बन परियोजना के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सहयोग से 31 जनवरी 2012 को लगाया गया था। यह देश का चौथा कार्बन अनुमापन केंद्र है। विश्व में इस तरह के 550 और भारत में 15 अनुमापन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। क्या होगा लाभ :  अनुमापन केंद्रों द्वारा एकत्रित किए गए आंकडों को अंतर्राष्ट्रीयस्तर पर भेजे जाएंगे। जो पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में मददगार सिद्ध होंगे।  वहीं इस टॉवर से न के...
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       घडियालों के पैसे पर डाल्फिन का संरक्षण प्रदेश में लगातार खत्म होती जा रही दुलर्भ प्रजाति की डाल्फिन पर ह र्षित चौरसिया की एक रिपोर् ट   चंबल नदी में पाई जाने वाली दुलर्भ प्रजा ति की डाल्फिन (फ्रेश वॉटर रिवर डाल्फिन,  सूस व वैज्ञानिक नाम प्लेटिनिक्टा) की संख्या साल दर साल घटती जा रही है। 5 अक्टूबर 2009 में राष्ट्रीय जल जीव घोषित दुलर्भ डाल्फिन के संरक्षण के लिए केंद्र द्वारा अलग से कोई राशि नहीं दी जा रही है। सूत्रों की मानें तो वन विभाग घडियालों के लिए आने वाली राशि में से ही डाल्फिन का संरक्षण किया जा रहा है। प्रदेश में एक मात्र अभयारण्य चंबल के पास से गुजरने वाली नदी में पाई जाने वाली डाल्फिन को प्रदेश में पहली बार सन 1984 में देखा गया था। इसके 12 साल बाद 1996 में आईसीयूसीएम की रेड डाटा बुक में वन्यजीवों की दुर्लभ प्रजातियों में संभावित स्थिति संकट ग्रस्त स्थिति में डाल्फिन को शामिल किया गया, जिसके बाद इसके संरक्षण के प्रयास शुरू किए गए। जानकारी मुताबिक 7 जुलाई 1997  में डब्ल्यडब्ल्यडब्ल्यू एफ ने दिल्ली में एक बैठक में 9 लोगों...
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पन्ना बफर जोन घोषित panna national park jungle safari जबलपुर। लंबी कवायदों के बाद आखिर पन्ना टाइगर रिजर्व को बफर जोन घोषित कर दिया गया। पन्ना के बफर जोन बन जाने के बाद अब प्रदेश में 6 टाइगर रिजर्व के साथ अब 6 बफर जोन भी हो गए है। बफर जोन का जितना फायदा ग्रामीणों को मिलेगा उतना ही लाभ इस क्षेत्र में विचरण करने वाले वन्यजीवों को। सूत्रों की मानें तो पन्ना को बफर जोन घोषित किए जाने के नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है, लेकिन यह नोटिफिकेशन अभी पन्ना नेशनल पार्क के अधिकारियों के पास तक नहीं पहुंचा है। गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पन्ना में बफर जोन गठित करने के लिए प्रदेश सरकार को सात दिन का समय दिया था। याचिकाकर्ता द्वारा 24 जुलाई को दिए गए निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार को पन्ना नेशनल पार्क में बफर जोन गठित करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया था। इसके अनुसार प्रदेश सरकार के पास बफर जोन के गठन के लिए 13 अगस्त तक का समय है। लगाया था अर्थदंड   कोर्ट ने पिछली सुनवाई में बफर जोन गठित न करने के कारण मध्यप्रदेश सरकार पर दस हजार रूपए का अर्थदंड भी लगाया था। स...
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संजय टाइगर रिजर्व गूंजी दहाड़ आखिर मिल ही गया बाघों का कुनबा   जबलपुर।  प्रदेश के टाइगर रिजर्व में एक के बाद एक तीन बाघों के मरने की खबर के बाद अब वन्यप्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर है। प्रदेश के संजय टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा होने की पुष्टि प्रदेश टुडे ने अपने 12 मई के अंक में (स्कैट रिपोर्ट के आधार) पर की थी। बाघों के पूरे परिवार के पार्क परिक्षेत्र में होने की पुष्टि वन विभाग द्वारा भी गई जाने के बाद पार्क प्रबंधन के अधिकारी काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। पार्क के अधिकारियों के मुताबिक पार्क परिक्षेत्र में 5 बाघों के होने की जानकारी दी गई है। विभाग ने इनके फुटमार्क के आधार पर पुष्टि की है। फुटमार्क के आधार पर इनकी लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा है। इनकी सुरक्षा को लेकर  24 घंटे गश्ती व गुप्त रूप मॉनीटरिंग की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है। एक नर, दो मादा, दो शावक अधिकारिक जानकारी के अनुसार पार्क परिक्षेत्र में 5 बाघों में एक नर, दो मादा, दो शावकों के विचरण कर रहे है। शावकों की उम्र करीब डेढ वर्ष बताई जा रही है। साथ गश्ती दल को बाघों द्वारा शिकार किए जानव...