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Showing posts from March, 2012

तीन रूप में दर्शन देती हैं माता हरसिद्धि

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सागर। जिले में रहली तहसील में रानगिर हरसिद्धि माता का पवित्र स्थान है। रानगिर के पुजारी अनिल शास्त्री ने बताया कि रानगिर का 1100 वर्ष पुराना मंदिर है। यह मंदिर पहले रानगिर में नहीं था नदी के उस पार देवी जी रहती थी। प्रतिदिन माता कन्याओं के साथ खेलने के लिए आया करती थी। एक दिन गांव के लोगों ने छिपकर देखा कि यह किसकी लड़की है सुबह खेलने आती है एवं सायंकाल को एक चांदी का सिक्का देकर कन्याओं को बूढ़ी रानगिर को चली जाती हैं। उसी दिन हरसिद्धि माता ने सपना दिया कि मैं हरसिद्धि माता हूं बूढ़ी रानगिर में रहती हूं। यदि बूढ़ी रानगिर से रानगिर में ले जाया जाए तो रानगिर हमारा नया स्थान होगा। बूढ़ी रानगिर पुराना स्थान होगा। गांव के लोग एक समूह बनाकर बूढ़ी रानगिर में गए एक बड़े भारी बेल वृक्ष के नीचे हरसिद्धि की प्रतिमा मिली लोगों ने बेल की सिंहासन पर बैठाकर रानगिर लाए गाजे-बाजे के साथ और जहां रानगिर में देवी जी का मंदिर बना वहां पर उतारा लिया। सायंकाल का समय हो गया था। दूसरे दिन लोगों ने उठाने का प्रयास किया कि आगे की ओर ले जाया जाए देवी जी की मूर्ति वहां से फिर कहीं नहीं उठी न ही हिला सके। ऐसा माना जाता ह...

बायसन ने जन्मा बच्चा

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हर्षित चौरसिया, भोपाल। हाल ही में कान्हा से बांधवगढ़ शिफ्ट किए गए 31 बायसनों में से एक बायसन ने बच्चे को जन्म दिया है। पार्क के डिप्टी डायरेक्टर मृदुल पाठक ने बताया कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। कान्हा से लाए 31 बायसनों को दूसरे बाड़े में शिफ्ट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बायसन स्वस्थ है। इन पर पार्क प्रबंधन द्वारा कड़ी नजर रखी जा रही है। बायसन के बच्चे को मिलाकर बांधवगढ़ में अब इनकी संख्या 32 हो गई है। गौरतलब है कि विगत दिनों बायसनों को तीन चरणों में शिफ्ट किया गया था। प्रदेश में यह दूसरी बड़ी सफल शिफ्टिंग है, जिसे दक्षिण अफ्रीका से आई एक टीम व पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पार्क के ही कर्मचारियों ने अंजाम दिया।

भारी पड़ी शिफ्टिंग

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भोपाल। प्रदेश में दुर्लभ वन्यजीवों का कुनबा बढ़ाने को लेकर की जाने वाली पहली शिफ्टिंग ही वन विभाग को भारी पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में की गई प्रदेश की सबसे बड़ी कृष्ण मृगों की शिफ्टिंग सफल तो हो गई, लेकिन विभाग को जिस बात का डर था वही हुआ। शिफ्टिंग के 10 बाद से कृष्ण मृगों की मौत होने शुरू हो गई लगातार हो रही मौतों का आंकडा अब तक 16 पहुंच गया है। कृष्ण मृगों की खबर लगते ही विभाग में हड़कंप मच गया और विभाग के आलाअधिकारी अब मौत का कारण जानने की उधेडबुन में लग गए। पार्क में हुई कृष्ण मृगों की मौत के संबंध में जब पार्क के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि संभवत: ये मौत कैप्चर मायोपैथी से हुई है और ये एक सामान्य बात है।  विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो पाने से कोई रोकथाम नहीं की जा सकती है। शेष कृष्ण मृग के व्यवहार पर नजर रखी जा रही है। अभी इन्हें स्वंतत्र क्षेत्र में विचरण के लिए नहीं छोड़ा गया है। हाल ही हुई कृष्ण मृगों की मौत के मामले के बाद विभाग प्रदेश में दिसंबर-जनवरी में होने वाली बारहसिंगा की शिफ्ंिटग को लेकर गहन चिंतन में लग गया है। जानकारी म...

अब घडियालों पर रिसर्च

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  हर्षित चौरसिया, भोपाल। दिसंबर-2007 -08 में किसी अज्ञात बीमारी के कारण एक के बाद एक सैकड़ों की संख्या में अज्ञात बीमारी के चलते हुई घडियालों की मौत के बाद चिंतित वन्यप्राणी फांरेसिक स्वास्थ्य केंद्र जबलपुर इन दिनों घडियालों के स्वास्थ्य को लेकर कई पहलुओं पर रिसर्च चल रही है। रिसर्च कर रहे वन्यप्राणी फांरेसिक स्वास्थ्य केंद्र के निदेशक डॉ एबी श्रीवास्तव ने बताया कि घडियालों के ब्लड, नार्मल डाटा बेस, बीमारियां तथा अकारण घडियालों के बच्चों की मौत पर रिसर्च की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक घडियालों के ब्लड की नार्मल वेल्यू के बारे कोई जानकारी नहीं है इस रिसर्च में इनकी ब्लड की नार्मल वेल्यू पता की जा रही है साथ ही घडियालों का पूरा डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इस रिसर्च को पूरे होने में एक वर्ष और लगेगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च से प्राप्त परिणामों के आधार पर आने वाले समय में घडियालों तथा इनके बच्चों को बचाया जा सकता है। जल्द ही छोड़गें घडियालों के बच्चों को घडियाल पुर्नवास केंद्र में जून 2011 में चंबल नदी से लाए गए  घडियालों के 500 अंडों में से करीब 423 बच्चे निकले। ये बच...

चीतों को शिफ्ट करने खर्च होंगे 82 करोड़

इम्पोर्ट लायसेंस में अटके चीते भोपाल। पालनपुर कूनों में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाने में अभी और समय लग सकता है। हालांकि चीतों को लाने के लिए वन विभाग प्रपोजल बनाकर केंद्र को भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक चीतों को लाने के लिए इम्पोर्ट लायसेंस मिलना बाकी है। लायसेंस के लिए कागजी कार्रवाई तो शुरू कर दी गई है, लेकिन इसे मिलने में काफी वक्त लग सकता है।  दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीतों को शिफ्ट किया जाना है जिनमें से 13 के लिए अनुमति मिल चुकी है शेष के लिए अनुमति मिलना बाकी है।  चीतों को शिफ्टिंग पर करीब 82 करोड़ रुपए खर्च होंगे।  इस राशि का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा चुका है।  सूत्रों के मुताबिक चीतों को जहां शिफ्ट किया जाना है उस क्षेत्र में फैसिंग को रिपेयरिंग का काम किया जा रहा है। बॉक्स हाल ही सिवनी के राजस्व क्षेत्र से कान्हा शिफ्ट हुए 50 काले हिरण में से 18 की मौत हो  जाने के बाद केंद्र ने बारहसिंगा की शिफ्टिंग को रोक दिया है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र से रिपोर्ट आने के बाद ही बारहसिंगों को शिफ्ट किया जाएगा। वर्जन विभाग ने प्रपोजल बनाकर भेज दिया है स्वी...