बैतूल का राजा करेगा, राजधानी के वन विहार में करेगा ‘राज’
बताया जाता है यह बाघ बैतूल जिले के सारणी के आबादी वाले क्षेत्र में शिकार के लिए निकला तो वन विभाग ने उसे इंसानों के लिए खतरा बनने से रोकते हुए उसे पकड़ा ओर सतपुडा टाइगर रिजर्व में राज करने के लिए छोड़ दिया। लेकिन कुछ दिनों बाद यह बाघ टाइगर रिजर्व की सीमा को पार कर फिर बैतूल के जंगल में अपनी टेरेटरी में वापस चला गया।
खबर चली कि यह वही बाघ है जो सारणी के जंगलों में घूम रहा था। एक बार फिर वन विभाग ने वेटरनरी डॉक्टरों व एक्सपर्टस की मदद से इसे पकड़ा ओर अब कान्हा टाइगर रिजर्व में इसे एक बाडे में रखा गया।
एक साल भेजा गया वन विहार
कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एल कृष्णमूर्ति ने बताया कि कान्हा टायगर रिजर्व के अंतर्गत घोरेला फेसिंग में लगभग वर्षभर से रखे गये बाघ को हमने शुक्रवार को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल के लिए रवाना कर दिया गया है। यह बाघ पूर्व में बैतूल जिले के सारणी क्षेत्र में आबादी वाले स्थान में पकड़ा गया था। इस बाघ को निश्चेत कर कान्हा स्थित घोरेला बाड़े में रखा गया था। बाद में इसे मुक्त विचरण हेतु वर्ष 2019 में सतपुड़ा टायगर रिजर्व में छोड़ दिया गया था। किन्तु कुछ सप्ताहों पश्चात यह बाघ टायगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर निकलकर पुन: बैतूल की ओर चला गया था एवं इसे दोबारा निश्चेत कर पुन: कान्हा टायगर रिजर्व के घोरेला बाड़े में देखभाल एवं मॉनीटरिंग के लिए रखा था।पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के निर्देशन पर बाघ को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल भेज दिया गया है। टाइगर को ट्रांसलोकेशन किए जाने की इस पूरी कार्यवाही में वेटरनरी डॉक्टर व एक्सर्पट डॉ. अखिलेश मिश्रा तथा डॉ. संदीप अग्रवाल ने की है। इसके साथ ही सुश्री अंजना सुचिता तिर्की, उप संचालक, एसके खरे, सहा. संचालक (हलोन), क्रांती झारिया, परिक्षेत्र अधिकारी, मुक्की एवं अन्य अमले ने सहयोग रहा है।
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