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Showing posts from December, 2019

1365 करोड़ से होगा बिगड़े बाँस वनों का सुधार

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 संरक्षण की कवायद में लगी प्रदेश सरकार की योजना से 1.5  हजार वनवासी परिवारों को होगा लाभ    जबलपुर। मध्य प्रदेश में बिगड़े हुए बांस के वनों के सुधार और सरंक्षण के लिए राज्य सरकार ने योजना तैयार कर 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले वनों को सुधारने के लिए 1365 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। संरक्षण की कवायद में राज्य सरकार की इस महती योजना से डेढ़ हजार वनवासी परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों ने अपना प्लान तैयार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि वनवासी समुदाय की आजीविका में वन उत्पादों का महत्वपूर्ण स्थान है। बताया जा रहा है कि  शासन ने वनवासियों की आजीविका को सुरक्षित आर्थिक आधार प्रदान करने के लिये बिगड़े बांस वनों के सुधार एवं संरक्षण की योजना के माध्यम से उपकृत करने का प्लान बनाया है।  योजना से शुरू के 4 सालों में लगभग डेढ़ हजार वनवासी परिवार लाभान्वित होंगे। वनवासियों को स्थाई आजीविका का साधन मिलेगा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, संयुक्त वन प्रबंधन  चितरंजन त्यागी ने बताया कि इस योजना से वनवासियों को स्थाई आजीविका का साधन मिलेगा। साथ ही,...

अलविदा 2019 : 88 हजार 683 पर्यटक पहुँचे पेंच टाइगर रिजर्व

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             हर साल लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या   जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व के बाद देश के सबसे लोकप्रिय टाइगर रिजर्व में शामिल  मध्यप्रदेश का पेंच टाइगर रिजर्व में पर्यटन वर्ष 2018-19 में 88 हजार 683 पर्यटकों ने अपनी आमद दर्ज कराई। पर्यटकों इसमें 79 हजार 852 भारतीय और 8 हजार 831 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। इससे रिजर्व को अब तक का सर्वाधिक 3 करोड़ 11 लाख 35 हजार 923 रुपये राजस्व प्राप्त हुआ।   इन वन्यजीवों का होता है दीदार पेंच टाइगर रिजर्व देश में सबसे अधिक शाकाहारी घनत्व वाला पार्क है। यहाँ मांसाहारी प्राणियों में बाघ, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, कुत्ते, लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी, भेड़िया, नेवला आदि और शाकाहारी प्रजातियों में मुख्य रूप से बायसन, चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, चिंकारा, जंगली सुअर आदि जानवरों की बहुतायत के साथ खूबसूरत जंगल भी सैलानियों को आकर्षित करते हैं। राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न मौसमों में लगभग 325 प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं। पार्क के तोतलाडोह जलाशय के डूब क्षेत्रों में सर्दी के...

कभी बाघ विहीन रहे पन्ना टाइगर रिजर्व में अब 55 बाघों का कुनबा

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हर्षित चौरसिया, जबलपुर। वर्ष 1994 में बाघों की मौजूदगी के चलते टाइगर रिजर्व का दर्जा पाने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्ष 2009 में ऐसा समय आया कि यहां पर एक भी बाघ नहीं बचा। टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया। इसके बाद वन विभाग के अफसरों और सरकार की कवायद से शुरू हुआ बाघ पुर्न: स्थापना का अभियान। 10 साल बाद आज पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के कुनबा में संख्या बढ़कर 55 तक पहुंच गई है।  मार्च 2009 में बांधवगढ़-कान्हा से आई थी टाइग्रेस बताया जाता है कि मार्च-2009 में बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व से 2 बाघिन को पन्ना लाया गया। इन्हें टी-1 और टी-2 नाम दिया गया। इसके बाद 6 दिसम्बर को पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ लाया गया, जिसका नामकरण टी-3 किया गया। इस बाघ का पन्ना टाइगर रिजर्व में मन नहीं लगा और वह वापस दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ा। हर वक्त सतर्क पार्क प्रबंधन ने 19 दिन तक बड़ी कठिनाई और मशक्कत से इसका लगातार पीछा किया और 25 दिसम्बर को इसे बेहोश कर पुन: पार्क में ले आये।    बाघ टी-3 को ढूंढना था मुश्किल  तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर. श्रीनिवास मूर्ति के मुताबिक बाघ पुर्न:स्थापना...

कान्हा की शान ‘मुन्ना’ बाघ के लिये वन विहार में नया घर तैयार

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                                                                                           सुपर केट है 17 वर्षीय है  मुन्ना  भोपाल। देश के सबसे लोकिप्रय बाघों में से एक और बरसों कान्हा की शान के नाम से मशहूर ‘मुन्ना’ बाघ के लिये वन विहार में नया घर (बाडा) तैयार हो गया है। मुन्ना बाघ आजकल भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय एकलव्य खेल प्रतियोगिता की पहचान लोगों बन गया है। इसे हाल ही में कान्हा टाइगर रिजर्व से भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में शिफ्ट किया गया है। पूरे विश्व में यह 17 वर्षीय बाघ मुन्ना अपने माथे पर अंकित धारियों केट और उ...

कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन बाघ की मौत

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               करंट लगने से हुई मौत की पड़ताल में जुटा महकमा जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शिकारियों की घुसपैठ के चलते एक बाघ ने दम तोड़ दिया। बफर जोन में हुई इस घटना की खबर लगते ही वन विभाग में हडकम्प मच गया। बताया जाता है कान्हा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत मोतीनाला बफर जोन के मंगली बीट कक्ष क्रमांक 190, टिकराझोड़ी में शाम को गश्ती के दौरान गंध आने पर गश्तीदल ने क्षेत्र में सर्चिग की। सर्चिग के दौरान  टीम ने बाघ का करकश देखा। इस पर रिजर्व के गश्ती दल ने पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। मौके पर पहुंची टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर अंजना सूचिता तिर्की, वेटरनरी डॉक्टर डॉ. संदीप अग्रवाल,  एनटीसीए के प्रतिनिधि आरके हरदहा, विश्व प्रकृति निधि एवं अशासकीय संस्था कार्बेट फाउंडेशन के प्रतिनिधि जीनल, सहा. संचालक, हलोन एवं परिक्षेत्र अधिकारी परिक्षेत्र का निरीक्षण किया। इसके बाद वेटरनरी डॉ. संदीप अग्रवाल ने एनटीसीए के प्रोटोकॉल के मुताबिक मौके पर ही पीएम किया तो प्राथमिक दृष्टया में बाघ की करंट ...