बाघों को गिनती के लिए वन अफसरों की स्पेशल ट्रेनिंग

टाइगर रिजर्व बने ट्रेनिंग सेंटरों प्रशि
क्षण दे रहे विशेषज्ञ

जबलपुर। देश में मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने के लिए वर्ष 2018 में होने वाली वन्यप्राणियों की गणना को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में इस बार बाघों की गणना वैज्ञानिकों के   स्पेशल ट्रेनिंग में बताए गए मापदंडों के आधार पर की जाएगी। अगले साल होने वाली वन्यप्राणी की गणना को लेकर वन विभाग ने अपने  मैदानी अमले को टेक्नीक से ट्रेंड करने का प्लान तैयार कर लिया है। इस प्लान के मुताबिक पूरे प्रदेशभर के वन अफसरों व मैदानी अमले को वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए पैरामीटर्स और टेक्नीक को प्रयोग के लिए ट्रेंड करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।  इसके लिए वन विभाग ने राज्य वन अनुसंधान के वैज्ञानिकों की मदद लेते हुए ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार कर लिए हैं।

टाइगर रिजर्व में हो रही ट्रेनिंग

राज्य वन अनुसंधान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक अंजना राजपूत ने बताया कि विभाग ट्रेंनिंग का जिम्मा उन्हें सौंपा है। प्रदेशभर के टाइगर रिजर्व में रेंज अधिकारियों व मैदानी अमले को वैज्ञानिक तकनीकों से गणना करने की ट्रेनिंग हम दे रहे है। ये मास्टर ट्रेनर अपने यहां के अधीनस्थ कर्मियों को इसकी ट्रेनिंग देंगे। इसके लिए 9 पैरामीटर्स तैयार किए गए है, जिनसे वन्यजीवों की सटीक गणना होगी

बनाए गए डिवीजन

ट्रेनिंग के लिए प्रोग्राम के तहत अलग-अलग टाइगर रिजर्व को सेंटर व इसके आसपास के जिलों के वन मंडल को शामिल कर डिवीजन में बांटा गया है। इनमें पन्ना टाइगर रिजर्व से लेकर कूनो अभयारण भी शामिल किया गया है।

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