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Showing posts from 2017

2.73 करोड़ हाईटेक, स्पेशल लेब्रोरेटरी एनीमल्स लैब बनेगी जबलपुर में

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वेटरनरी यूनिवर्सिटी में प्रदेश की पहली लैब बनकर तैयार   हर्षित चौरसिया, जबलपुर  पशु रोगों की पहचान, असाध्य पशु रोगों पर की जाने वाली रिसर्च, नए ड्रग की खोज तथा नये टीके बनाने के लिए किये गये प्रयोगों को आगे बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश की पहली हाईटेक और स्पेशल लेब्रोरेटरी एनीमल्स लैब नाना जी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी में खुलने जा रही है। 2.73 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना के अंतर्गत शुरू की जाने वाली यह पहली लैब होगी, जहां पर देश की सबसे अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल पशु रोगों की रोकथाम और अनुसंधान के लिए किया जाएगा।   इन वन्यजीवों को रखा जाएगा इस हाईटेक लैब में विशेष प्रजाति के चूहे, माइस, गिनीपिग, हेमस्टर तथा खरगोशों को रखा जाएगा। इस परियोजना के लिये राशि मप्र कृषि मार्केटिंग भोपाल ने स्वीकृत कर दी है। क्या होगा लैब में खास 2.73 करोड़ की लागत से तैयार की जाने वाली इस लैब को 5 हजार 4 सौ वर्ग फुट में तैयार किया जाएगा। इसमें 12 लेब्रोरेटरी पशुओं के कमरें होंगे, जिनमें अलग-अलग पशुओं को रखा जाएगा। जिनमें एलबिनो रेट, एलबिनो माइस, गिनीपिग, हेमस्टर तथा खरगो...

बाघों को गिनती के लिए वन अफसरों की स्पेशल ट्रेनिंग

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टाइगर रिजर्व बने ट्रेनिंग सेंटरों प्रशि क्षण दे रहे विशेषज्ञ जबलपुर। देश में मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने के लिए वर्ष 2018 में होने वाली वन्यप्राणियों की गणना को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में इस बार बाघों की गणना वैज्ञानिकों के   स्पेशल ट्रेनिंग में बताए गए मापदंडों के आधार पर की जाएगी। अगले साल होने वाली वन्यप्राणी की गणना को लेकर वन विभाग ने अपने  मैदानी अमले को टेक्नीक से ट्रेंड करने का प्लान तैयार कर लिया है। इस प्लान के मुताबिक पूरे प्रदेशभर के वन अफसरों व मैदानी अमले को वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए पैरामीटर्स और टेक्नीक को प्रयोग के लिए ट्रेंड करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।  इसके लिए वन विभाग ने राज्य वन अनुसंधान के वैज्ञानिकों की मदद लेते हुए ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार कर लिए हैं। टाइगर रिजर्व में हो रही ट्रेनिंग राज्य वन अनुसंधान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक अंजना राजपूत ने बताया कि विभाग ट्रेंनिंग का जिम्मा उन्हें सौंपा है। प्रदेशभर के टाइगर रिजर्व में रेंज अधिकारियों व मैदानी अमले को वैज्ञानिक तकनीकों से गणना करने की...

बाघ शावकों की सुरक्षा के लिए धारा 144

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बिगडे हुए हालातों को काबू करने के लिए लगाई जाने वाली धारा 144 के बारे में आमतौर पर सभी परिचित है। लेकिन क्या आपने कभी बाघों की सुरक्षा के लिए इस धारा को लगाया जाना सुना है। जी हां कुछ यह धारा इन दिनों उमरिया जिले के अंर्तगत आने वाले ग्राम धामाखोर से निकलने वाली सडक पर जिले के कलेक्टर ने लगा दी है।  प्रदेश में यह पहली बार है जब एक मादा बाघ और उसके 4 शावकों की सुरक्षा के मद्देनजर रखते हुए लिया गया यह निर्णय पूरे प्रदेश में चर्चा में है। हालांकि सडक के किनारे अपने 15 दिन के 4 शावकों को लेकर बैठी हुई मादा बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अपनी मॉनीटरिंग में है, तो जिला कलेक्टर अभिषेक सिंह बाघ और उसके शावकों की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर दिखाई दे रहे है।  फिलहाल पार्क की बाघिन टी-43 के 4 शावक पूरी तरह से स्वस्थ बताए जा रहे है। क्या है आदेश कलेक्टर ने उक्त क्षेत्र से गुजर रही सडक में शाम को 6 बजे से सुबह 6 बजे तक भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई है। इसके साथ ही दो पहिया वाहन जो कि सुबह 6 बजे के बाद निकलेंगे वे एक काफिले के रूप में वन विभाग की अनुमति से प्रवेश करेंगे। वहीं जो...