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कान्हा टाइगर रिजर्व में तेंदुए की रेस्क्यू मुहिम: शिकारियों के फंदे से बचाया गया तेंदुआ

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कान्हा टाइगर रिजर्व में एक तेंदुआ शिकारियों द्वारा बिछाए गए तार के फंदे में फंस गया, लेकिन वन विभाग की तत्परता ने उसकी जान बचा ली। गश्ती दल के कर्मचारियों ने जब तेंदुए की दर्द से कराहने की आवाज सुनी, तो वे तुरंत मौके पर पहुंचे और फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी को सूचित किया। इसके बाद, फील्ड डायरेक्टर के नेतृत्व में एक रेस्क्यू टीम तैयार की गई, जिसमें वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल और अन्य एक्सपर्ट शामिल थे। रेस्क्यू ऑपरेशन की त्वरित सफलता टीम ने महज 30 मिनट में रेस्कयू ऑपरेशन के दौरान तेंदुए को बेहोश किया और इसके बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर जब यह पाया गया की वह  स्वस्थ  है इसके बाद  उसे जंगल में वापस छोड़ दिया गया। फील्ड डायरेक्टर ने रेस्क्यू टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि वन अपराध दर्ज कर लिया गया है और इसकी आगे की जांच जारी है।   एक्सपर्ट   डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि ऐसे मामलों में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। रेस्क्यू में देरी से तेंदुए के शरीर में घाव हो सकते थे या तनाव की वजह से उसकी जान भी जा सकती थी। उन...

बांधवगढ़ में कुनबा बढाएंगे सतपुड़ा से आए गौर

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 5 गौरों का सफलतापूर्वक, ट्रांसलोकेशन, दूसरा चरण शुरू जबलपुर| 24 जनवरी, 2026 मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) के लिए आज का दिन जैव-विविधता के संरक्षण की दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि लेकर आया। 'गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम' के दूसरे चरण की सफल शुरुआत करते हुए, आज सुबह सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए 5 गौरों को बांधवगढ़ के कलवाह परिक्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया। सफलतापूर्वक संपन्न हुआ पहला पड़ाव शुक्रवार को प्रातः 9:30 से 10:00 बजे के बीच, क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय और उपसंचालक योहान कटारा की  उपस्थिति में इन गौरों को बाड़े में मुक्त किया गया। इस समूह में 01 नर और 04 मादा गौर शामिल हैं। इन गौरों को कल यानी 22 जनवरी को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना वन क्षेत्र से भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम और क्षेत्र संचालक राखी नंदा के नेतृत्व में कैप्चर किया गया था। क्यों खास है यह मिशन? भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और मध्य प्रदेश वन विभाग के इस संयुक्त प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य गौरों की जनसंख्या में आनुवंशिक विविधता (Genetic Variability) सुनिश...

सोलर फेंसिंग की चपेट में आने से हुई थी युवा बाघिन की मौत, पीएम में खुलासा

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   बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर क्षेत्र ने मिला था शव #harshitchourasiyajouranlist #tigerdeath #Bandhavghartiger जबलपुर। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में हुई बाघिन की मौत सोलर फेंसिंग के करंट की चपेट में आने से हुई थी। मौत का खुलासा शनिवार को अफसरों की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा किये गए पीएम के बाद आई रिपोर्ट में हुआ है। कल मिले बाघिन के शव का शनिवार को पीएम के बाद एनटीसीए की गाइड लाइन के मुताबिक शवदाह की प्रक्रिया पूरी की गई। निजी खेत में मिला था बाघिन का शव प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार (16 जनवरी) को ग्राम पुटपुरा स्थित एक निजी राजस्व क्षेत्र में बाघिन का शव देखा गया। यह घटनास्थल बांधवगढ़ के धमोखर बफर की पिपरिया बीट (कक्ष क्रमांक PF 112) से करीब 700 मीटर की दूरी पर स्थित है। मृत बाघिन की उम्र लगभग 4 से 5 वर्ष बताई जा रही है।

कान्हा में वर्चस्व की जंग: बाघ के हमले में मादा तेंदुए की मौत

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#harshitchourasiyajouranlist जबलपुर। विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से प्रकृति के क्रूर नियम और वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष की एक दुखद खबर सामने आई है। यहाँ क्षेत्र (Territory) और शिकार के वर्चस्व को लेकर हुए संघर्ष में एक बाघ ने मादा तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया। डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक जांच घटना की जानकारी मिलते ही पार्क प्रबंधन ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घटनास्थल को पूरी तरह सुरक्षित किया। किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप या अवैध शिकार की आशंका को खारिज करने के लिए डॉग स्क्वाड के माध्यम से आस-पास के इलाके की बारीकी से छानबीन की गई। वन्यजीव चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर पहुँचकर प्रारंभिक साक्ष्य जुटाए । पोस्टमार्टम में बाघ के हमले की पुष्टि फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में यह साफ हो गया कि तेंदुए की मृत्यु आपसी संघर्ष का परिणाम थी। तेंदुए के शरीर पर बाघ के दांतों के गहरे घाव और संघर्ष के निशान मिले हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ और तेंदुआ दोनों ही जंगल के शीर्ष शिकारी हैं और अक्सर भोजन या अपने इलाके की ...

बाघों के गढ़ खोजी जा रही तितलियों की प्रजातियां

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  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तितलियों का सर्वे शुरू जबलपुर। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में शुक्रवार से तीन दिवसीय तितली सर्वे का काम प्रारंभ हो गया है। नौ रेंज में 60 वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ वनकर्मी 20 कैम्प में तितली की विभिन्न प्रजातियों को एप में कैद किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वन क्षेत्र में बायोडायवर्सिटी व तितलियों की प्रजाति ज्ञात करना है। 9 रेंज में शुरू हुआ सर्वे टाइगर  रिजर्व प्रबंधन अनुसार बांधवगढ़ के सभी 9 रेंज (कोर व बफर रेंज) में यह सर्वेक्षण का काम चलेगा। जानकारी अनुसार 1536 वर्ग कि.मी. में फैले बांधवगढ़ के भीतर करीब 70 तितलियों की प्रजाति पाई जाती हैं। खासबात यह है कि टीम में शामिल नेचर्लिस्ट, बीटगार्ड व श्रमिकों के साथ कैम्प में रहेंगे। जंगल के भीतर दलदली व जल स्त्रोतों के समीप पहले से ही तितली के अनुकूल एरिया को चिन्हित कर लिया गया था। शुक्रवार की सुबह कैम्पों से सर्वे टीम जंगल के लिए रवाना हुई। मौके पर ही मिली तितली प्रजाति को एप में स्टोर किया गया। सर्वेक्षण के आखिरी दिन 22 सितंबर को सर्वे की रिपोर्ट फाइनल की जायेगी। एक कैम्प में होंगे तीन विशेषज्ञ उप संचालक पी....

कान्हा के बारासिंघा सतपुडा टाइगर रिजर्व में भरेंगें कुलांचे

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जबलपुर। देश के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व कान्हा के बारहसिंगा अब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में कुलाचें भरेंगे।  01 अप्रैल को कान्हा के सरही परिक्षेत्र स्थित सौंफ मैदान से 09 बारासिंघा (02 नर एवं 07 मादा) को सफलता पूर्वक केप्चर किये जाकर सतपुड़ा टायगर रिजर्व की ओर रवाना किया गया। इस पूरे केप्चर प्रक्रिया का नेतृत्व सुनील कुमार सिंह, क्षेत्र संचालक, कान्हा टायगर रिजर्व द्वारा किया गया। केप्चर आपरेशन के दौरान  पुनीत गोयल, उप संचालक (कोर), डाॅ. संदीप अग्रवाल, वन्यप्राणी चिकित्सक एवं उनका रेस्क्यू दल तथा कान्हा टायगर रिजर्व के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा भाग लिया गया। इसके पूर्व कान्हा से सतपुडा टा. रि. 106 (22 नर एवं 74 मादा, 10 बच्चे) बारासिंघा स्थानांतरित किये गये है। राज्य पशु बारासिंघा के सतपुडा टायगर रिजर्व में ट्रांसलोकेशन हेतु भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा अनुमति दी गई थी।  31-03-2024 को समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा विषय विशेषज्ञों द्वारा बारासिंघा केप्चर हेतु विशेष रूप से निर्मित बोमा का निरीक्षण किया गया एवं बारासिंघा केप्चर की रणनीति तैयार की गई...

चंचल हथनी के इलाज में जुटे वेटरनरी के एक्सपर्ट

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 जबलपुर। छतरपुर से आई हथनी चंचल पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही है। सतपुला पुल के पास एक कॉलोनी के ग्राउंड में बीमार चंचल का ईलाज करने के लिए वेटरनरी एक्सपर्ट की टीम लगी हुई। बताया जा रहा है कि अब चंचल की सेहत में पहले से सुधार आया है।