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Showing posts from June, 2018

टाइगर कैसे करता है किलाबंदी जानेंगे वैज्ञानिक

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कान्हा पहुंची डब्ल्यूआईआई की टीम, होगी रिसर्च हर्षित चौरसिया, जबलपुर जं गल का राजा अपनी किलाबंदी कैसा करता है। जंगल में राज करने के लिए वह कैसे-कैसे प्रयोग करता है उसकी वास्तविक दैनिक दिनचर्या को जानने के लिए वाइल्ड लाइफ के वैज्ञानिकों ने अनुसंधान करने की तैयारी शुरू की है। इसके लिए देश के सबसे बड़े संस्थान वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. झाला अपनी टीम के साथ प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में डेरा डाले हुए हैं। करीब एक दर्जन से ज्यादा वैज्ञानिक और अधिकारियों की टीम कोर जोन में पहुंची चुकी है। रिसर्च के लिए टाइगर को लोकेट करने के लिए  वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीम सर्चिग में जुटी रही। कॉलर आईडी से होगी मॉनीटरिंग बताया जा रहा है कि रिसर्च के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व के बाघ को कॉलर आईडी पहनाई जाएगी। इस आईडी के जरिए टाइगर लोकेशन के साथ उसकी टेरेटरी बनाने, उसकी दिनचर्या, उसके खान-पान से लेकर मादा बाघ के साथ उसके व्यवहार तक सभी की मॉनीटरिंग की जाएगी। बनाया गया कंट्रोल रूम देहरादून से आए वैज्ञानिक वायवी झाला के निर्देशन में यह प्रोजेक्ट शुरू किया गय...

विदेशी हाईब्रीड गाय को ‘गौमाता’ नहीं मान रहे अखिलेश्वरानंद

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  मिलिट्री फार्म की गायों को सरकार के लेने पर नया विवाद हर्षित चौरसिया, जबलपुर भारतीय मूल के गौ-वंश को संरक्षित करने की दिशा में काम रहे गौ-संवर्धन बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद ने अब नॉन इंडियन हाईब्रीड काऊज पर आपत्ति जाहिर की है। सरकार द्वारा मिलिट्री फार्म की गाय को लिए जाने की बात सामने आने पर यह नया विवाद खड़ा होता दिखाई दे रहा है। फार्म की गाय को वे भारतीय मूूल का गौ-वंश नहीं मानते हैं। कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अखिलेश्वरानंद ने  कहा कि वे भारतीय गौ-वंश के संरक्षण के लिए काम कर रहे है। फार्म पर जो गाय है वे नॉन इंडियन हाईब्रीड काउज है इन्हें गाय तो कहा जा सकता है, लेकिन इन्हें गौ-वंश की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। ए-1 मिल्क है स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उन्होंने कहा कि यह बात वैज्ञानिकों द्वारा रिसर्च में सामने आ चुकी है कि ए-1 मिल्क स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। देशी गायों से मिलने वाला ए-2 मिल्क ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। ऐसे में किसान, पशुपालक इन हाइब्रीड गायों को ले तो लेंगे, लेकिन वह जनसामान्य के लिए हितकर नहीं है। गौ-शाल...

आसान नहीं था कान्हा ‘राजा’ को पकड़ना

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 4 हाथी, 40 कर्मियों की टीम ने एक घंटे में पूरा किया ऑपरेशन हर्षित चौरसिया, जबलपुर  कान्हा टाइगर रिजर्व के खूंखार व्यस्क खूखार बाघ को पकड़ना आसान नहीं था। 200 किलो वजनी इस बाघ को पकड़ने में चार हाथी और चालीस लोगों का स्टाफ जुटा रहा। करीब एक घंटे के ऑपरेशन के बाद बाघ पर नियंत्रण पाया जा सका। इस बाघ को कल ही उड़ीसा के सतकोशी टाइगर रिजर्व भेजने की कार्रवाई की गई। इस बाघ को कान्हा कोर जोन के घने इलाके से हाथियों के माध्यम से ट्रैप कर केज में डालने की कार्रवाई पूरी हुई। यह पूरा ऑपरेशन देहरादून से आए विशेषज्ञ व कान्हा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संजय शुक्ला, डिप्टी डायरेक्टर केएस भदौरिया, बफर जोन की डिप्टी डायरेक्टर अंजना सुचिता तिर्की के मार्गदर्शन में वेटरनरी डॉक्टर डॉ. संदीप अग्रवाल, पेंच टाइगर रिजर्व के डॉ. अखिलेश के मार्गदर्शन में पूरी हुई।  ऑपरेशन में डॉ. के रमेश वरिष्ठ वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, डॉ. राकेश शुक्ला अनुसंधान अधिकारी, डॉ. अखिलेश मिश्र  वन्यप्राणी चिकित्सक पेंच टाइगर रिजर्व, एसके खरे, एसके सिन्हा, रंजीत सिंह उइके, एसके मिश्र, एसके सेन्...

वीयू:देशी गाय की कोख से जन्मा साहीवाल का बछड़ा

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 प्रदेश में पहला प्रयोग, वैज्ञानिकों की मेहनत लाई रंग हर्षित चौरसिया, जबलपुर देश में गायों की देशी उन्नत नस्ल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी (वीयू)के वैज्ञानिकों के प्रयास से देशी गाय की कोख से गायों की सबसे उन्नत नस्ल साहीवाल का बछड़ा जन्मा। अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल और अनुभवी वैज्ञानिकों द्वारा प्रदेश में ऐसा प्रयोग पहली बार किया गया है। देशी गाय की कोख से जन्मे बछड़े के साथ उसकी सेरोगेट मदर (सिर्फ जन्म देने वाली मां) पूरी तरह से स्वस्थ है। 3.5 करोड़ का है प्रोजेक्ट वीयू के आईपीआरओ डॉ. ओपी श्रीवास्तव बताते हैं कि गोकुल मिशन के अंतर्गत किया गया यह प्रोजेक्ट 3.5 करोड़ रुपए का है जिस पर वेटरनरी के वैज्ञानिक रिसर्च करने में लगे हुए हैं। पहला प्रयोग सफल हो चुका है अब आगे इसे बड़े स्तर पर करने की तैयारी की जा रही है। सम्मानित होंगे वैज्ञानिक वीयू में हुए इस सफल प्रयोग में डॉ. मनीष शुक्ला के साथ डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. नीरज वर्मा, डॉ. आसिया सुरेश, डॉ. सलीमा अहमद कावरी, डॉ. एकनाथ, डॉ. ललीता मोहन, डॉ. संदीप रहंगडाले ने काम किय...