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Showing posts from 2022

लंगूर के शिकार में तेंदुए ने गवांई अपनी जान

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    पेंच के मोगली अभ्यारण्य में मिला तेंदुए के साथ लंगूर का शव जबलपुर। गर्मी में पानी की तलाश में नाले में पानी पीने आए एक लंगूर पर तेंदुए ने हमला कर दिया। लंगूर अपनी जान बचाने के लिए नाले के पास के ही करीब 25 मीटर ऊंचे साजा प्रजाति के पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन फुर्तीले तेंदुए ने पीछा करते हुए उसे दबोच लिया। शिकारबाजी के दौरान तेंदुआं और लंगूर पेड़ से नीचे गिर गए, इसमें तेंदुए के हमले से जहां लंगूर की मौत हो गई, वहीं ऊंचाई से गिरने के चलते तेंदुए ने भी दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी तब लगी जब रोजाना की तरह वन विभाग का गश्ती दल गश्ती कर क्षेत्र से गुजर रहा था। बताते हैं कि पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी अंतर्गत पेंच मोगली अभ्यारण परिक्षेत्र कुरई की बीट गंडाटोला (कक्ष क्रमांक 643-644) के सीमा नाला 18.04.2022 को एक वयस्क मादा तेन्दुआ (आयु लगभग 8 से 10 वर्ष) एवं एक मादा हनुमान लंगूर के शव जल स्त्रोत से लगभग 3 मीटर की दूरी पर स्टाफ को गश्ती के दौरान दिखाई दिए। स्टाफ ने इसकी सूचना पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। सूचना मिलने के बाद डॉग स्क्वाड के साथ पार्क के वेटरनरी डॉक्टर डॉ. अखिले...

अपने इलाके में घुसे शावक को बाघ ने मारकर आधा खाया

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  पेंच टाईगर रिजर्व के मोगली अभ्यारण्य में हुई घटना प्रदेश के चर्चित पेंच टाइगर रिजर्व में एक व्यस्क बाघ ने अपने इलाके (टेरेटरी)  में घुसे बाघ शावक पर बाघ ने पहले हमला किया, इसके बाद खूंखार बाघ ने शावक को मारकर आधा खा लिया।  घटना की खबर मिलते ही मौके पर वन विभाग के आला अफसर के साथ वेटरनरी डॉक्टर पहुंचे, लेकिन शव परीक्षण और इलाके की सर्चिंग बाद बताया गया कि उक्त बाघ शावक टेरोटोरियल फाइट का शिकार हो गया है। अधिकारी इसे प्राकृतिक घटना मानते हैं कि क्योंकि जंगल में बाघ के संघर्ष को लेकर इस तरह लड़ाई आमतौर पर देखने को मिलती है। कराई गई डाग स्काव ड से सर्चिंग, सुरक्षित मिले अंग डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि बाघ शावक का जहां पर शव मिला था, वहां के करीब एक से डेढ़ किमी की रेंज में हमने डाग स्कावड व अपनी टीम से सर्चिंग कराई है। लेकिन शिकार जैसा कुछ भी नहीं सामने आया है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस इलाके में बाघ शावक का शव मिला है वहां पर एक दिन पहले नर व्यस्क बाघ विचरण कर रहा था। जहां बाघ शावक का शव मिला है उससे कुछ दूर ही एक मवेशी का शव आधा खाया हुआ मिला है। पार्क प्रबंधन क...

पन्ना टाईगर रिजर्व में जीपीएस टैग किये हिमालयन ग्राफिन गिद्ध 60 दिनों में पहुंचे चीन

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प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में  फरवरी 2022 में  भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के सहयोग से 25 गिद्धों को सौर्य ऊर्जा चलित जीपीएस टैग लगाये गये थे। टैग किये गये गिद्धों में 13 इंडियन वल्चर 02 रेड हेडेड वल्चर 08 हिमालयन ग्रफिन एवं 02 यूरेशियन ग्रिफिन वल्चर है। गिद्धों को टैग करने का मुख्य उद्देष्य गिद्धों के आवागमन एवं रहवास के संबंध में सतत जानकारी एकत्रित करना है । टैंगिंग के पश्चात इस संबध्ां में लगातार जानकारी प्राप्त हो रही है। जो बहुत ही रोचक एवं गिद्धों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण है। हाल ही में 02 हिमालयन ग्रिफिन गिद्धों के आवागमन मार्ग के संबध्ां में जानकारी प्राप्त हुई है कि जिससे रोचक तथ्य निकलकर सामने आये है। उक्त जानकारी रिजर्व के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने दी।उन्होंने बताया कि पहला हिमालयन ग्रिफिन एचजी 8673 के जी.पी.एस. टैग की प्राप्त जानकारी से पता चला है कि यह गिद्ध पन्ना टाईगर रिजर्व से अपना प्रवास समाप्त कर अभी हाल ही में चीन के तिब्बत के समीप पहुंच गया है। यह गिद्ध पन्ना टाईगर रिजर्व से बिहार में पटना। इसके बाद  नेपाल के सागरमथा राष्ट्रीय उद्यान से एवरेस्ट...

देश में पहली बार 25 गिद्धों की जीपीएस टैगिंग

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 पन्ना टाईगर रिजर्व में हुई गिद्धों के व्यवहार की प्राथमिक जानकारी की अनूठी पहल प्रदेश में पन्ना टाइगर रिजर्व में गिद्धों के व्यवहार और रहवास के मामले में प्रमाणिक जानकारी जुटाने में देश में पहली बार अनूठी पहल हुई है। यहाँ गिद्धों को पकड़कर जीपीएस टैगिंग की जा रही है। गिद्ध टेली मेट्री परियोजना की बड़ी उपलब्धी हासिल हुई है। गिद्ध टैगिंग भारत के ओल्ड वर्ल्ड गिद्धों के विलुप्त होने से रोकने और संरक्षण की सुनियोजित पहल है। इस अनूठी पहल से अब तक 14 गिद्ध प्रजातियों को 24 देशों में टैग कर अध्ययन किया गया है। इसमें कोई भी भारत से नहीं है। भारत में गिद्धों की 9 प्रजातियाँ हैं। गिद्ध प्रजाति के संरक्षण में प्रदेश को अच्छे परिणाम मिले हैं। वर्ष 2021 में गिद्धों बढ़कर 9446 हो गई है। 7 प्रजाति के गिद्ध है पन्ना टाइगर रिजर्व में भारत में उपलब्ध गिद्धों की 9 प्रजातियों में से 3 प्रजाति संकट ग्रस्त है। इनमें से 7 प्रजाति पन्ना टाइगर रिजर्व में उपलब्ध है। इनमें ‍हिमालयन ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन और सिनरस जैसी प्रवासी प्रजातियाँ और भारतीय लम्बी चेंच वाला गिद्ध, सफ...

अब पेंच में नहीं गूंजेंगी कॉलरवाली बाघिन की थर्राहट

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कर्माझिरी रेंज में हुई मौत, वन्यजीव प्रेमियों में शोक लहर जबलपुर। पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी की विश्वविख्यात मादा बाघ टी-15 कॉलरवाली के दर्शन वन्यजीव प्रेमियों को नहीं हो सकेंगे। यह उम्रदराज बाघिन अब इस दुनिया में नहीं रही। इससे सम्पूर्ण पार्क प्रबंधन से लेकर विश्व के वन्यप्राणी प्रेमियों में शोक की लहर व्याप्त है।     पेंच टाईगर रिजर्व के अंतर्गत परिक्षेत्र कर्माझिरी के बीट कुम्भादेव के कक्ष क्रमांक 589 में कॉलरवाली बाघिन ने 15 जनवरी 2022 को सायं 6ण्15 बजे अंतिम सांस ली। लगभग 16.5 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी इस बाघिन की मृत्यु उसकी वृद्धावस्था के कारण होना पुष्ट है। पार्क प्रबंधन के वन्यप्राणी चिकित्सक द्वारा विगत एक सप्ताह से लगातार निगरानी रखी जा रही थी। मृत्यु उपरांत पार्क प्रबंधन के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा एवं डॉ. अमोल रोकड़े पशु चिकित्सक एसडब्ल्यूण्एफएच (स्कूल आफ वाईल्ड लाईफ एंड फारेंसिक हेल्थ) जबलपुर द्वारा 16 जनवरी 2022 को प्रात: एनटीसीए के एसओपी के अनुसार शव परीक्षण करए ूिसरा अंगों का पयोगशाला अन्वेषण हेतु संग्रहण किया। पेंच टाइगर रिजर्व को ...